जायडस कैडिला को कोविड-19 के इलाज के लिए अपनी न्यूट्रलाइज़िंग मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) बेस्ड कॉकटेल के क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति मिल गई है. सेंट्रल ड्रग एंड स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने जायडस कैडिला की एंटीबॉडी कॉकटेल ZRC-3308 के फेज 1 और  फेज 2 क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी दे दी है. कंपनी ने पहले क्लिनिकल ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को आवेदन किया था.

कंपनी ने कहा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल ZRC-3308, दो SARS-CoV-2-न्यूट्रलाइजिंग मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) का एक कॉकटेल है. यह शरीर में बनने वाले नेचुरल एंटी बॉडी की नकल करता और कोरोना वायरस संक्रमण को बढ़ने से रोकता है.

मृत्यु के जोखिम को कम करती है एंटीबॉडी कॉकटेल

यह थैरेपी लक्षणों की शुरुआत के पहले 10 दिनों के भीतर हाई रिस्क वाले कोविड मरीजों के लिए सबसे उपयुक्त है. यह माइल्ड से मॉडरेट कोरोना संक्रमित मरीजों को दी जा सकती है. वयस्कों और 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के अलावा माइल्ड से मॉडरेट लक्षण वाले कोरोना के मरीज और ऐसे मरीज जिन्हें गंभीर रोग विकसित होने का हाई रिस्क है और उन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं है को ये एंटीबॉडी कॉकटेल दिया जा सकता है.
ये एंटीबॉडी उच्च जोखिम वाले रोगियों की स्थिति खराब होने से पहले, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को 70 प्रतिशत तक कम करने में सहायक है.

रोश और रेजेनरॉन की एंटीबॉडी कॉकटेल को मिल चुकी है मंजूरी 

रोश और रेजेनरॉन कंपनी के एंटीबॉडी कॉकटेल को भारत में आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिल चुकी है. सेंट्रल ड्रग एंड स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने हाल ही में भारत में रोश और सिप्ला लिमिटेड की एंटीबॉडी कॉकटेल (Casirivimab and Imdevimab) के लिए एक इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन (EUA) दिया है. इस दवा को अमेरिका और कई यूरोपीय यूनियन देशों में भी मंजूरी मिली है.