साल 2020 में कोरोनावायरस के कारण अब तक 7.84 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। इस एपिडेमिक को छोड़ दें तो अब भी इंसानी जानों का सबसे बड़ा दुश्मन कोई बड़ा सा भारी-भरकम जीव नहीं बल्कि अदना सा मच्छर ही है। तमाम मेडिकल एडवांसमेंट्स के बावजूद दुनियाभर में हर साल मच्छर जनित रोगों के कारण 7 लाख से ज्यादा मौतें हो जाती हैं। एंटी मलेरिया दवाएं होने के बावजूद 4.35 लाख लोग सलाना विश्व में इस बीमारी से मर जाते हैं। वहीं, डेंगू-चिकगुनिया जैसी बीमारियों के खिलाफ अभी भी कोई वैक्सीन नहीं बनी है बल्कि प्लेटलेट्स थेरेपी से इसे ठीक करने की कोशिश की जाती है। शायद यही कारण है कि मच्छरों को इंसानों का दुश्मन नंबर वन समझा जाता है और इसीलिए कहा जाता है कि एक मच्छर भी जानलेवा साबित हो सकता है। वर्ल्ड मॉस्कीटो डे पर जानते हैं मच्छरों से जुड़े इन्हीं फैक्टर्स को…

इन पर डालिए नजर

– नर मच्छरों को खून की दरकार नहीं होती है, वह फलों व पेड़-पौधों का रस पीकर अपनी भूख मिटा लेते हैं।

– खून की तलब केवल मादा मच्छर को होती है। वह खून अंडों को सेने से पहले पीती है।

– आमतौर पर मच्छर भरी दोपहर में सक्रिय नहीं होते।

– डेंगू का मच्छर दिन में भी सक्रिय होता है मगर अक्सर सीधी धूप वाले इलाकों में इनकी पहुंच नहीं होती है।

– शाम के वक्त ज्यादातर मच्छर सक्रिय हो जाते हैं। ये ही इनका मेटिंग टाइम होता है।

– मच्छर रूके हुए पानी, गीली जमीन और हल्की मॉइस्चर वाले सतहों पर अपने अंडे सेते हैं।

गंध पहचानते हैं मच्छर

– सांस में छोड़ी जाने वाली कार्बन डायऑक्साइड और पसीने की गंध, शराब पीने पर यह बढ़ जाते हैं।

– मुख्यतः मच्छर लैक्टिक एसिड व ऑक्टेनल से काटने के लिए आकर्षित होते हैं और ये हमारे पसीने में होता है।

ये चीज़ें साबित होती हैं अच्छी मॉस्कीटो रिपेलेंट

डीईईटी

पिकारिडिन

पीएमडी

लेमन यूकेलिप्टस का तेल

आईआर 3535

इसलिए शरीर में होती है खुजली

1. मच्छर के काटने पर अक्सर आपको हल्की सी चुभन और खुजली होती है।

2. इसका कारण ये है कि मच्छर अपनी डंक से इंसानी त्वचा की सतह पर एंटी कोऑगुलेंट छोड़ता है।

3. इससे उसे खून पीने में आसानी हो जाती है और रक्त पतला होकर उसके शरीर में पहुंच जाता है।

4. मगर इससे शरीर का रिस्पॉन्स इम्यून सिस्टम एक्टिव हो जाता है और इसीलिए आपको त्वचा पर खुजली महसूस होती है।

बीमारी फैलाने वाले मच्छरों के प्रकार

एडीस, क्यूलेक्स, एशियन टाइगर मॉस्कीटो, क्यूलेक्स पिपेंस, मार्श मॉस्कीटो, सोरोफोरा सिलिएटा, टॉक्सोरिंच, क्यूलीसेटा, क्यूलिसिनेई, मैनसोनिया, येलो फीवर मॉस्कीटो, कुलीसिडे व अन्य।