राहुल गांधी किसानों को लेकर एक पुस्तिका जारी करने के लिए प्रेस कांफ्रेंस में आते हैं. उनसे कई तरह से सवाल-जवाब होते हैं. एक सवाल इस व्हाट्स एप चैट को लेकर चुप्पी के बारे में होता है जिसके जवाब में राहुल गांधी पहले अंग्रेज़ी में और फिर हिन्दी में बोलते हैं.

1 टीवी एंकर की बालाकोट एयरस्ट्राइक संबंधी whatsapp chat के बारे में जांच की मांग की.
2 आखिर क्या थी इस chat में ऐसी कहानी.

16 जनवरी को व्हाट्सएप चैट की बातें वायरल होती हैं. किसी को पता नहीं कि चैट की तीन हज़ार पन्नों की फाइलें कहां से आई हैं. बताया जाता है कि मुंबई पुलिस TRP के फर्ज़ीवाड़े को लेकर जांच कर रही थी. उसी दौरान इस मामले में गिरफ्तार पार्थो दासगुप्ता से बातचीत में रिपब्लिक टीवी के मालिक और एंकर अर्णब गोस्वामी कई तरह की जानकारी होने के दावे करते हैं जिनका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से भी है और कैसे उन जानकारी के इस्तमाल से रेटिंग में कथित तौर पर घपला किया जा सकता है जिससे चैनल या अर्णब गोस्वामी को करोड़ों की कमाई हो सकती है.

वही आपको बता दे की सरकार ने इस मामले को संवेदनशीलता से नहीं लिया. कम से कम उसे अपने स्तर पर महाराष्ट्र की मुंबई पुलिस से इसकी पुष्टि करनी चाहिए थी कि बातचीत की सत्यता क्या है क्योंकि इस चर्चा से राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं. आतंक के गंभीर मामलों में जांच करने वाली NIA भी पहल कर सकती थी और बुलाकर इस मामले में पूछताछ कर सकती थी. वैसे ये चैट मुंबई पुलिस की टीआरपी जांच में शामिल की गई एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट का हिस्सा है. कोर्ट में दाखिल हुआ है. फिर भी सरकार अपने स्तर पर पता कर सकती थी. लेकिन उसकी गहरी चुप्पी ने संदेह के बादलों को और भी गहरा कर दिया. जिसके बाद इसके ऊपर सवाल उठाना बंद हो गया.

आपको बता दी की 19 नवम्बर यानि कल राहुल गांधी किसानों को लेकर एक पुस्तिका जारी करने प्रेस कांफ्रेंस में आते हैं. उनसे कई तरह से सवाल-जवाब होते हैं. एक सवाल इस व्हाट्स एप चैट को लेकर चुप्पी के बारे में होता है जिसके जवाब में राहुल गांधी पहले अंग्रेज़ी में और फिर हिन्दी में बोलते हैं. हिन्दी वाला हिस्सा यहाँ दे रहा हूं. राहुल गाँधी यही जबाव को सवाल बनाकर विपक्छ से इसका जबाव मांगते है.

कहने का मतलब है कि सरकार को पता था कि व्हाट्स एप चैट को लेकर चर्चा हो रही है. राहुल के बयान के बाद और ख़बरों के छपने के बाद भी पता है. तो अब क्यों नहीं कुछ बोल रही है? इतना कहा जा सकता था कि सरकार की नज़र में यह बात है और जांच हो रही है. संदेश गया कि सरकार इस इंतज़ार में है कि लोगों का ध्यान इससे भटक जाए. सरकार ने सामने से इसका सामना नहीं किया. सोशल मीडिया में वायरल होता रहा. और आअज नतीजा बहुत बड़ा हो गया है.