किसानो और सरकार के बिच समझौते को न खत्म होते देख अब सुप्रीम कोर्ट ने भी अपना दकलह देना शुरू कर दिया है.सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए एक कमेटी बनायीं है.अब वो कमेटी ये फैसला सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी की क्या बिल में सुधर होनी चाहिए या बिल में कोई गलती नहीं है.

करीब दो महीने से किसान किसान सड़क पर ठंड में ठिठुर रही है.बीते दो महीने में किसान सरकार से 9 दफा बात भी कर चुकी है.लेकिन मसला अभी भी फंसा हुआ है .सरकार बिल वापिस महि लेना चाहती तो किसान सड़क से हटने को तैयार नहीं .इन्ही सब को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दखलअंदाज़ी की और एक कमेटी की गठन की हैं .

  • भूपेंद्र सिंह मान, भारतीय किसान यूनियन
  • डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, इंटरनेशनल पॉलिसी हेड
  • अशोक गुलाटी, एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट
  • अनिल घनवत, शेतकरी संघटना, महाराष्ट्र

अब कमेटी का काम यह है बिल में कितनी खामियां और कितनी खूबियां है ये सुप्रीम कोर्ट को को कमेटी बताएगी.कमेटी बनाने से पहले CJI ने सरकार को फटकार भी लगायी थी की 46 दिनों से किसानो के साथ सरकार क्या बात कर रही है जो अबतक मसाला सुलझ नहीं सका.बता दें अब तक सरकार और किसान की 9 राउंड की बातचीत हो चुकी है .लेकिन मामला फंसा हुआ है.

ऐसे में अब जब सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बनी है तो सरकार-किसानों के बीच बना हुआ गतिरोध टूटेगा और किसी निर्णय की ओर आगे बढ़ते दिखेंगे.कमेटी में चार लोग है जो रिपोर्ट बताएगी की बिल वापिस हिनी चाहिये या नहीं. ऐसे में अब जब सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बनी है तो सरकार-किसानों के बीच बना हुआ गतिरोध टूटेगा और किसी निर्णय की ओर आगे बढ़ते दिखेंगे.