झांसी। सरकार हर घर जल पहुंचाने के दावे कर रही है, लेकिन महानगर में कई घरों तक आज भी पानी की आपूर्ति नहीं है। लोगों को पानी के लिए तो परेशान होना ही पड़ता है। साथ ही हर महीने बिल भी आता है। आलम यह है कि जिन क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंचता, वहां के लोग भी पानी के लिए कर अदा कर रहे हैं। इसे लेकर लोगों में आक्रोश है।
महानगर में पानी की किल्लत लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। महानगर के सिद्धेश्वर नगर, आईटीआई, मसीहागंज, गुमनावारा, करगुवांजी, डड़ियापुरा समेत कई क्षेत्रों में पानी का संकट है। आलम यह है कि इन क्षेत्रों में पानी की पाइपलाइन डाली गई है, लेकिन पानी नहीं पहुंचता है। वहीं जल निगम लोगों से हर महीने 120 रुपये के हिसाब से जलकर वसूल करता है। लोगों ने कई बार जल निगम की मनमानी पर आक्रोश जताया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। लोग बताते हैं कि पानी की आपूर्ति के लिए टैंकरों के सहारे रहना पड़ता है। हैंडपंप भी खराब पड़े हैं।
बिल जमा करना मजबूरी
जल निगम हर साल जलकर के बिल लोगों के यहां भेज देता है। कई बार लोगों ने बिल जमा भी नहीं किए, लेकिन बकाया ज्यादा हो जाने पर विभाग में कोई सुनता नहीं है। इसलिए फिर बिल जमा करना मजबूरी बन जाता है।
कहते हैं लोग
पानी को लेकर बहुत परेशानी होती है। पाइप लाइन पड़ी है, लेकिन पानी नहीं आता। बिल भरना पड़ता है। – हेमराज बुंदेला
पानी के लिए टैंकर आते थे, अब वो भी बंद हो गए हैं। बिल भी आता है। अब तक जमा नहीं किया है। – आसिफ अली
पानी का बिल हर साल 1400 रुपये का आता है। हम तो बिल जमा नहीं करेंगे। जब पानी तो बिल क्यों? – मजहर खान
हमारे क्षेत्र में पानी की बहुत दिक्कत है। टैंकरों के सहारे रहते हैं। पीने का पानी दूर से लाते हैं।- रवि
पानी के नाम पर हर साल बिल आता है। पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। बिल जमा करना पड़ता है। – दिनेश
पानी की बहुत समस्या है। गर्मियों में सबसे ज्यादा परेशानी होती। पाइपलाइन तो पड़ी है, पानी का पता नहीं। – नीरज
क्षेत्र में एक टैंकर आता है। कनेक्शन ले रखे हैं, लेकिन पानी कभी नहीं आता। बिल जमा करना पड़ता है। – रविंद्र कुशवाहा
टैंकर भी चंदा करके मंगाते हैं। पानी का बिल जमा न करो, तो विभाग वाले विलंब दंड लगाते हैं। – हयात
हैंडपंप भी खराब पड़ा है। लोगों की दिक्कत से नेताओं को कोई मतलब नहीं है। पैसा जरूर लेते हैं। – विमला
पानी की किल्लत तो झेल रहे हैं। अ बिल तब तक जमा नहीं करेंगे, जब तक पानी नहीं मिलेगा। – विनोद यादव