कोरोना संक्रमण के पहले दौर में बुरी तरह ध्वस्त हो चुका रोजगार क्षेत्र धीरे-धीरे पटरी पर आता दिख रहा है. मार्च ( 2021) में रोजगार के मोर्चे पर थोड़ी राहत दिखी है. इस महीने बेरोजगारी दर में थोड़ी कमी आई है. फरवरी में बेरोजगारी दर 6.90 फीसदी थी लेकिन अब यह घट कर 6.52 फीसदी पर आ गई है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 7.24 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 6.19 फीसदी है. हालांकि बेरोजगारी दर में यह गिरावट कितनी स्थायी साबित होगी, अभी कहा नहीं जा सकता क्योंकि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश देश के कई बड़े राज्यों में संक्रमण की दूसरी लहर दिख रही है और इससे लॉकडाउन लगाने की आशंकाएं बढ़ गई है. इससे आर्थिक गतिविधियों को झटका लग सकता है और बेरोजगारी दर बढ़ सकती है.

रूरल सेक्टर में ज्यादा रोजगार

बहरहाल, CMIE के नए आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक लोगों को रोजगार मिला है. फरवरी में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर फरवरी में 6.99 फीसदी थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में फरवरी में बेरोजगारी की दर थी 6.86% फीसदी. ग्रामीण इलाकों में खेती-बाड़ी का काम बढ़ने की वजह से बेरोजगारी दर में कमी आई है. हालांकि यह आशंका जताई जा रही है कि अगर देश के कुछ राज्यों खास कर महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण की स्थिति गंभीर होती है और कुछ इलाकों में लॉकडाउन लगाने की जरूरत पड़ती है तो बेरोजगारी के मोर्चे पर एक बार फिर संकट गहरा सकता है. कोरोना को वजह से अप्रैल 2020 में बेरोजगारी दर 23.52 फीसदी और और मई 2020 में 21.73 फीसदी के रिकार्ड लेवल पर पहुंच गई थी.

हरियाणा में सबसे ज्यादा बेरोजगारी

ताजा आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा बेरोजगारी हरियाणा में 28.1 फीसदी पर बनी हुई है. गोवा में 22.1 फीसदी, राजस्थान में 19.7 फीसदी त्रिपुरा में 13.9 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 14.3 फीसदी, बिहार में 14.5 फीसदी, झारखंड में 12.8 फीसदी और और दिल्ली में 9.4 फीसदी है. मध्य प्रदेश में बेरोजगारी का स्तर सबसे कम है. मार्च में यहां बेरोजगारी दर केवल 1.6 फीसदी रही. वहीं असम में यह 1.1 फीसदी है. गुजरात में 2.1 फीसदी कर्नाटक 1.2 फीसदी, ओडिशा 1.6 फीसदी, सिक्किम में 1.7 फीसदी और छत्तीसगढ़ में 2.7 फीसदी है.