• छतीसगढ़ के धमतरी जिले में बिहान योजना के तहत 20 समूहों की 100 महिलाएं बना रही हैं ये ख़ास राखियाँ, इन राखियों की ऑनलाइन बिक्री भी शुरू की गई है।
  • धमतरी (छत्तीसगढ़)। इस रक्षाबंधन छत्तीसगढ़ में गोबर और बीज की अनूठी राखियां ख़ास आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। यही नहीं छत्तीसगढ़ की संस्कृति को समेटे हुए बांस, चंदन, हल्दी, कुमकुम और रेशम से बनी वैदिक राखियों को भी खूब सराहा जा रहा है।लॉकडाउन का लम्बा समय बीतने के बाद बिहान समूह की महिलाएं ये अनूठी राखियां बना रही हैं। इससे न सिर्फ उनको वापस रोजगार मिल सका है बल्कि वे इन राखियों को बेचकर समूह में अच्छी कमाई भी कर रही हैं।दस से 200 रुपये में बिक रहीं इन राखियों को फिलहाल धमतरी और रायपुर जिले में बिक्री के लिए रखा गया है, इसके साथ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत इन राखियों की ऑनलाइन बिक्री भी शुरू की गई है।बिहान योजना के तहत महिलाओं के इन समूहों से जुड़ीं और धमतरी जिला पंचायत की सीईओ नम्रता गाँधी ‘गाँव कनेक्शन’ से बताती हैं, “पूर्ण लॉकडाउन खत्म होने के बाद करीब दो महीनों से समूह की ये महिलाएं रक्षाबंधन को लेकर ये राखियाँ बना रही हैं। इसमें जिले की करीब 60 महिलाएं काम कर रही हैं जो अब तक 10 हजार से ज्यादा राखियाँ बना चुकी हैं।”
  • नम्रता के मुताबिक ये महिलाएं चार तरह की ख़ास राखियाँ बना रही हैं। इसमें पहली राखी बांस के आधार पर गोबर में बीज को रखकर राखी बनाई गई है जिससे बाद में पौधा लग सकता है। दूसरी राखी में बांस और रेशम का काम है, तीसरी तरह की राखी में बांस और क्रोशि के धागे से काम हैं, जबकि चौथी तरह की ख़ास राखी जोड़ों के लिए बनाई गई है, इसे कुमकुम-अक्षत राखी कहा गया है। इसके अलावा हल्दी, कुमकुम, चंदन से बनीं वैदिक राखियाँ भी छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू समेटे हुए हैं।कोरोना काल में जहाँ लोगों के रोजगार प्रभावित हुए हैं, वहां आपदा को अवसर में बदलने की ताकत छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने दिखाई है। समूह की ये महिलाएं राखियों को बनाने के साथ स्थानीय स्तर पर आपूर्ति भी कर रही हैं। रक्षाबंधन को देखते हुए अब तक 10 हजार राखियों में से सात हजार से ज्यादा राखियाँ बिक भी चुकी हैं। इससे समूह को 5.26 लाख से ज्यादा रुपए मिले हैं।