वे हांकी के जादुगर हैं, अकेले पुरी टीम को गोल कर सकते हैं। वे क्रिकेट में एक बॉल में 6 छक्के मार सकते हैं।वह आवाज को सूंघ सकते हैं।वह जिस अस्पताल में पैदा हुए, वह उन्होंने ही बनाया था…। यह वह विश्वास है, जो रजनीकांत के फैन्स उनके बारे में रखते हैं।आप इंटरनेट पर उनके जोक्स खंगालेंगे, तो ऐसे न जाने कितनी अकल्पनीय किस्से निकल आएंगे जिससे आप अवाक् हो जायेगें। उनके फैन्स उन्हें थलाइवा कहते हैं।एक ऐसा व्यकति जिस पर आंख मूंद कर भरोसा किया जा सकता है। लेकिन आज थलाइवा ने पहली बार अपनी बेबसी जाहिर की। उसने फैन्स से माफी मांगी है। और कहा है कि भगवान ने उन्हें इशारा कर दिया है कि यह काम उनकी बुते की नहीं है। जिस राजनीति में आने की इच्छा यह सुपरहीरो दिल में दबाए बैठा था, बीमारी ने उसे बेबस कर दिया है।

आपको बता दे की कुछ दिन पहले ही रजनीकांत ने राजनिती में आने की घोषणा की थी। वे 31 दिसंबर को तमिलनाडु में नई पार्टी भी लौंच करने वाले थे। रजनीकांत से पहले एमजी रामचंद्रन, जयललिता और एम करुणानिधि ने राज्य के राजनीतिक फलक पर एकछत्र राज किया था। माना जा रहा था कि रजनीकांत भी ऐसा कर सकते हैं।लेकिन अंतिम वक्त में पटकथा बदल गई और क्लाइमेक्स कुछ अलग रूप में आया।

क्लाइमेक्स ऐसा बदला की रजनीकांत ने खराब सेहत की वजह से चुनावी राजनीति में नहीं आने का फैसला कर लिया। उन्होंने मंगलवार को तमिल में लिखी एक चिट्ठी जारी कर कहा कि वे चुनाव में उतरे बिना ही लोगों की बाहर से सेवा करेंगे। आगे उन्होंने कहा कि वे खराब सेहत के बावजूद राजनीति में आने का ऐलान कर वीरता नहीं दिखाना चाहते।अपने समर्थकों को भी परेशान नहीं करना चाहते।साथ ही कहा- इस फैसले से फैन्स को निराशा होगी, लेकिन मुझे माफ कर दीजिए।

डॉक्टर्स ने दी रजनी को आराम की सलाह दी

वे बीते 25 दिसंबर को ब्लड प्रेशर में हो रहे उतार-चढ़ाव और थकान महसूस होने के बाद हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में भर्ती हुए थे। दो दिन बाद उन्हें छुट्टी दी गई। डॉक्टर्स ने रजनी को एक सप्ताह तक बेड रेस्ट, कम से कम फिजिकल एक्टिविटीज और कोरोना से बचे रहने की सलाह दी थी।