कोरोना वायरस के दुनिया में फैलने से पहले ही , हर देश की राजनीति एक एक्टिव वायरस से पीड़ित रही है और वो वायरस है सत्ता की । जिसे हम Strongman वायरस भी कहते हैं । ये वायरस इतना घातक है जो की एक पूरे देश और उसकी लोकतांत्रिक रीड को तोड़ – मरोड़कर रख देता है ।

2019 के आखिर में वुहान से निकले एक जानलेवा बीमारी कि ओर जब पूरी दुनिया का ध्यान केंद्रित है तब कुछ ऐसी भी सरकारें और नेता हैं जो अपना ही उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं । पहले हम बात चीन कि ही कर लेते हैं , राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस विश्वमारी के क्षण को
दक्षिण चीन सागर में विवादित भित्तियों के आसपास अपने नियंत्रण को कसने के लिए चुना है, इतना ही नहीं उन्होंने तो अपने सियासी फायदे के लिए हांगकांग के सबसे प्रमुख लोकतांत्रों को गिरफ्तार किया और हांगकांग के मूल कानून में एक छेद कर दिया है। इसके अलावा LAC पर विवादास्पद माहौल बनाकर वो देश के आर्थिक मुद्दों को भटकाने की भी कोशिश कर रहे । ये हाल सिर्फ एक देश का नहीं है , यहां कई ऐसे नेता है जो स्वयं के लिए अधिक शक्ति हड़पने के खातिर महामारी का लाभ उठा रहे हैं

हंगरी के राष्ट्रपति विक्टर ओरबैन ने संसद में एक कानून पारित किया है जो उन्हें असीमित समय के लिए डिक्री द्वारा शासन करने की अनुमति देगा, जिससे उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य के नाम पर “असाधारण उपाय” निलंबित करने और लेने की अनुमति मिलेगी। आपातकालीन शक्तियों के तहत, “भ्रम या अशांति” पैदा करने वाली सूचना या सामग्री प्रकाशित करने वालों को तीन से पांच साल की जेल की सजा दी जा सकती है।
वहीं इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 2 मार्च के चुनावों के नतीजों के बावजूद, देश के लोकतांत्रिक संस्थानों को कोरोनोवायरस के नाम पर बंद कर अपनी सत्ता बनाए रखने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं भारत के अजिज मित्र देश रूस , के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पूर्व में प्रस्तावित संवैधानिक परिवर्तनों के लिए उनके स्पष्टीकरण के हिस्से के रूप में कोरोनावायरस द्वारा अराजकता का हवाला दिया था जो उन्हें 2024 में पांचवें कार्यकाल के लिए चलाने की अनुमति देगा और संभवतः वह ऐसेमे 2036 तक शासन कर सकेंगे।

सुपर पॉवर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो सीधा धमकी पर उतर आए हैं व्हाइट हाउस में हुए एक मीडिया कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नवंबर के चुनाव में हारने पर सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण करने से इनकार कर दिया है वहीं उनके अच्छे दोस्त और भारत के प्रधान मंत्री मोदी के राज्य में भी ‘ सब चंगा सी ‘ ऐसा नहीं है , केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार 2020-21 वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच विकास दर में 23.9 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है जोकी अनुमान लगाए गए आंकड़ों से कहीं ज़्यादा है । इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक दुनिया भर में कोरोना संकट के चलते 50 करोड़ लोगो ने अपना रोज़गार खोया है । जिसमे से 2 करोड़ लोग मात्र भारत से हैं । खैर इन आंकड़ों का राजनेताओं से क्या लेना उन्हें तो बस गरीब और किसानों की चिताओं पर अपनी चुनावी रोटियां सेकनी है । हमारे देश भारत के गरीब तबके का शायद यह दुर्भाग्य ही है जो प्रधान मंत्री विश्व के सुप्रसिद्ध खिलाड़ी को बुलाकर उसकी मन कि बात सुन लेते हैं लेकिन मजदूर किस्नानों या आम वर्ग से उसके मन कि बात नहीं पूछते ।