नई दिल्ली: सोने में निवेश करने का अच्छा मौका है. निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में निवेश कर सकते हैं. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 31 अगस्त से निवेश के लिए खुल गया है. यह मौका ऐसे समय में आया है, जब सोने की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब पांच हजार रुपये गिर चुकी है. इस स्कीम में चार सितंबर तक निवेश किया जा सकता है. इसका इश्यू प्राइस आरबीआई ने 5,117 रुपये प्रति ग्राम रखा है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

ऑनलाइन भुगतान पर छूट
डिजिटल माध्यम से आवेदन और भुगतान करने पर 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट भी दी जाएगी. ऐसे निवेशकों के लिए प्रभावी भाव 5,067 रुपये प्रति ग्राम होगा. नई सीरीज के गोल्ड बॉन्ड आठ सितंबर को इश्यू कर दिए जाएंगे.

यहां से खरीद सकते हैं
बॉन्ड की बिक्री कॉमर्शियल बैंक, भारतीय स्टॉक होल्डिंग निगम लिमिटेड (एसएचसीआईएल) और कुछ चुनिंदा डाकघरों तथा शेयर बाजारों जैसे भारतीय राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से की जाएगी.

कितना सोना खरीद सकते हैं?
इस स्कीम के तहत सबसे छोटा बॉन्ड 1 ग्राम के सोने के बराबर होगा. कोई भी व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 500 ग्राम सोने का बाॉन्ड खरीद सकता है. कुल मिलाकर व्यक्तिगत तौर पर बॉन्ड खरीदने की सीमा 4 किलो वहीं ट्रस्ट या संगठन के लिए 20 किलोग्राम रखी गई है.

कितना मिलेगा ब्याज?
जब आप इन बॉन्डों में निवेश करते हैं तो सोने की कीमतों के बढ़ने से मिलने वाले फायदे के अलावा ये बॉन्ड सालाना 2.50 फीसदी ब्याज भी देते हैं. इस ब्याज का भुगतान छह महीने में होता है. इन बॉन्ड में निवेश की न्यूनतम सीमा एक ग्राम है.


लंबी अवधि के निवेश के लिए सही

निवेश सलाहकारों का कहना है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड उन निवेशकों के लिए अच्छा है जो लंबी अवधि के लिहाज से निवेश करना चाहते हैं और इसे मैच्योरिटी तक रखना चाहते हैं. इसकी वजह यह है कि इसमें कोई एक्सपेंश रेशियो नहीं है. निवेशक को सालाना 2.5 फीसदी ब्याज मिलता है. ये बॉन्ड मैच्योरिटी पर टैक्स फ्री हैं. इसके मुकाबले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड का एक्सपेंश रेशियो सालाना 50 से 80 बेसिस प्वाइंट है. इसमें कोई ब्याज नहीं मिलता है. हालांकि, इसमें लिक्विडिटी ज्यादा है.

टैक्स बचाने के लिहाज से बेहतर
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड टैक्स के लिहाज से खासकर एचएनआई के लिए बहुत अच्छा है, क्योंकि इसे मैच्योरिटी तक रखने पर कैपिटल गेंस टैक्स नहीं देना पड़ता है. इसके मुकाबले शेयर पर 10 फीसदी कैपिटल गेंस टैक्स लगता है. डेट फंड के मामले में इंडेक्सेशन के साथ कैपिटल गेंस टैक्स 20 फीसदी है. ईटीएफ में भी डेट फंड की तरह टैक्स के नियम लागू होते हैं.