वक्त पूरा देश कोविड की दूसरी लहर की चपेट में है. डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी बिना किसी ब्रेक के चौबीसों घंटे मरीजों की जान बचाने में जुटे हुए हैं. इस बीच कई हिस्सों से अस्पताल में बेड, दवा, आईसीयू, ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी ज़रूरी चीजों की कमी की रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं.

कुल मिलाकर ये समय आम लोगों के साथ-साथ डॉक्टर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए बेहद मुश्किल भरा है. काम का प्रेशर और लोगों को न बचा पाने की बेबसी डॉक्टर्स को भावनात्मक रूप से तोड़ रही है. कथित तौर पर हाल ही में दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल के एक डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली.

पुलिस को डॉक्टर का शव उसके घर के पंखे से लटका मिला. शुरू में कहा गया कि कोरोना के चलते बढ़े काम और हर रोज सामने हो रही मौत से परेशान होकर डॉक्टर ने यह कदम उठाया. हालांकि, बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई बात नहीं है. पुलिस को डॉक्टर के घर से एक सुसाइड नोट ज़ररू मिला है, मगर उसमें किसी पर भी आरोप नहीं लगाया गया है.

डॉक्टर की पहचान विवेक (35) के रूप में हुई है. विवेक गोरखपुर के रहने वाले थे और मैक्स अस्पताल में काम करते थे. डॉ. विवेक एक महीने से आईसीयू में ड्यूटी दे थे और कोरोना मरीजों की जान बचाने में जुटे थे. छह महीने पहले उनकी शादी हुई थी और पत्नी दो महीने की गर्भवती है. दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक आत्महत्या से पहले डॉक्टर विवेक ने अपने होने वाले बच्चे के नाम से एक वीडियो संदेश पत्नी को भेजा था.

इस वीडियो में डॉ. विवेक ने अपनी पत्नी को संबोधित करते हुए कहा, ‘कोकिला मुझे नहीं पता, तुम मुझसे क्या उम्मीद रखती हो. मैं उलझकर रह गया हूं. तुम अक्सर कहती हो कि मां के घर में खुश हूं. तुम्हारी मां कहती है कि यहां फोन क्यों करते हो. क्या मेरा हक नहीं हैं कि मैं फोन कर अपनी पत्नी से हालचाल पूछ सकूं. मैंने तुम्हें कब प्यार नहीं किया, तुम्हारे लिए अपनी मासूम सी बहन को डांटा मारा मैं खुश होना चाहता था. मगर तुमने तो मेरी उस खुशी को भी तार-तार कर दिया. सॉरी बच्चे, तुझे देख नहीं पाऊंगा. मगर तेरा बाप कायर नहीं था, उसे हालात ने मारा’

वहीं, पुलिस के मुताबिक डॉक्टर विवेक की मौत का असली कारण पता लगाने के लिए छानबीन शुरू हो चुकी है. पुलिस पारिवारिक कलह जैसे कई बिंदुओं पर भी जांच कर रही है.