प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित जसराज भले ही अब न रहे हों, लेकिन उनकी गायकी नैनीताल की फिजा में आज भी याद की जाती है। पंडित जसराज ने 1950 के दशक में सुरों की महफिलें सजाईं।

इतिहासकार प्रो. अजय रावत बताते हैं कि पंडित जसराज वर्ष 1955 से 1960 के बीच तीन बार यहां आयोजित होने वाले ऑटम फेस्टिवल में शामिल हुए थे। तब भी तत्कालीन नगर पालिका प्रशासन इस फेस्टिवल को आयोजित कराता था, जो दस दिनों तक चलता था।

प्रो. रावत बताते हैं कि चूंकि तब मनोरंजन के साधन सीमित थे, लिहाजा ऑटम फेस्टिवल में खूब भीड़ उमड़ती थी। फेस्टिवल का मुख्य आयोजन तो फ्लैट्स मैदान में होता था, लेकिन संगीत की महफिल शैले हॉल या फिर रिंक थिएटर में आयोजित की जाती थी।

प्रो. रावत के मुताबिक पंडित जसराज यहां संगीताचार्य पंडित चंद्रशेखर पंत की अध्यक्षता में आयोजित होने वाले शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम में हिस्सा लेते थे। इस कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन के पिता और महान कवि हरिवंश राय बच्चन भी शिरकत करते थे।प्रो.रावत के मुताबिक संगीत संध्या में गायक दुर्गा दास मुखर्जी, सानियाल समेत कई जानी मानी हस्तियां शामिल होती थीं। प्रो. रावत बताते हैं कि तब यहां गजब का साहित्यिक माहौल था। 1950 के दशक में ही नैनीताल में शशि कपूर की पत्नी जैनिफर कैडिल की कंपनी शेक्सपियर ड्रामेटिकल ने मरचेंट ऑफ वीनस और हेमलेट जैसे नाटकों का मंचन किया था।

नैनीताल में कवि सम्मेलन आयोजित कराने का श्रेय महान कवयित्री महादेवी वर्मा को जाता है। इतिहासकार प्रो. अजय रावत का कहना है कि वर्ष 1952 में ऑटम फेस्टिवल के दौरान पहला कवि सम्मेलन हुआ था। कवयित्री तारा पांडे इसकी आयोजक थीं, जबकि महादेवी वर्मा ने अध्यक्षता करते हुए इसके आयोजन में अहम भूमिका निभाई थी

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