शिवपाल सिंह यादव ने भले ही मुलायम के आंगन की होली में इस दफा शामिल होना मुनासिब नहीं समझा जबकि इससे पहले पिछले साल एक मंच पर अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह थे, लेकिन तब मुलायम सिंह यादव भी मौजूद रहे थे. इस बार मुलायम सिंह यादव अस्वस्थ होने के चलते सैफई की होली में सम्मिलित नहीं हो सके. मुलायम सिंह की गैर मौजूदगी में अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह का अलग-अलग मंच सजाने का मौका दे दिया.

उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सियासत भले ही दो हिस्सों में तीन साल पहले ही बंट गई हो, लेकिन होली के पर्व पर ‘यादव परिवार’ अभी तक एक साथ जमा होकर मुलायम के आंगन में जश्न मनाते रहे हैं. इस बार सैफई की होली का नजारा काफी कुछ बदला-बदला नजर आया और मुलायम परिवार दो धड़ों में बंटा हुआ दिखा. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन कर चुके शिवपाल यादव ने पहली बार सैफई में अपने भतीजे व सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ होली मनाने के बजाय अलग रंग उड़ाना बेहतर समझा. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्या वजह रही कि चाचा-भतीजे ने इस बार एक साथ होली नहीं मनाई.

शिवपाल सिंह यादव ने भले ही मुलायम के आंगन की होली में इस दफा शामिल होना मुनासिब नहीं समझा जबकि इससे पहले पिछले साल एक मंच पर अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह थे, लेकिन तब मुलायम सिंह यादव भी मौजूद रहे थे. इस बार मुलायम सिंह यादव अस्वस्थ होने के चलते सैफई की होली में सम्मिलित नहीं हो सके. मुलायम सिंह की गैर मौजूदगी में अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह का अलग-अलग मंच सजाने का मौका दे दिया.

मुलायम सिंह यादव परिवार एक साथ अपने पैतृक गांव इटावा के सैफई में होली मनाता रहा है. इस बार भी सैफई में होली के लिए मुलायम के आंगन में मंच बनाया गया था, लेकिन पूरा परिवार नहीं जुटा. सपा प्रमुख अखिलेश यादव सैफई में परिवार के तमाम छोटे-बड़े राजनीतिक गैर राजनीतिक सदस्य के साथ होली के रंग खेलते दिखाई दिए. अखिलेश के मंच पर रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव, तेजप्रताप यादव, अक्षय यादव, अभिषेक यादव, अनुराग यादव और कार्तिकेय एक साथ सैफई में होली मनाते दिखे.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव के सैफई की होली से नदारद रहने पर सांकेतिक भाषा में बड़ा बयान दिया है. अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल सिंह यादव को लेकर कहा कि वो होली कहीं और मना रहे होंगे. इसीलिए यहां नहीं हैं. अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं और परिवार के साथ फूलों की होली खेली. वहीं, अखिलेश के मंच पर रामगोपाल ने फागुन गीत गाया. सबसे बड़ी और खास बात तो यह रही कि इससे पहले हमेशा सपा प्रमुख अखिलेश यादव और महासचिव प्रो.रामगोपाल यादव का संबोधन हुआ करता था जबकि इस बार वह संबोधन नहीं सुनाई दिया.

वहीं, लंबे अरसे से अपने भतीजे अखिलेश यादव से वैचारिक मतभेद के चलते अलग पार्टी का गठन कर चुके शिवपाल सिंह यादव ने होली के मौके पर इस दफा एक नई इबारत लिख डाली है. उन्होंने अपने पिता सुधर सिंह के नाम पर स्थापित किए एसएस मेमोरियल स्कूल में होली का जश्न अपने समर्थकों के साथ मनाया. शिवपाल यादव के साथ उनके बेटे आदित्य यादव भी मुलायम के आंगन में होली नहीं मनाई.

पंचायत चुनाव को लेकर जहां एक ओर शिवपाल सिंह यादव ने अपने भतीजे और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव को एक बार फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने का आशीर्वाद दिया है. ऐसे में शिवपाल सिंह यादव की परिवार से होली पर दूरी, कहीं न कहीं बड़ा संकेत माना जा रहा है. इसके पीछे सीधे तौर पर राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं, क्योंकि अगले साल विधानसभा चुनाव हैं.

दरअसल, शिवपाल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में कई सीटों पर अपने उम्मीदवारों को भी उतारा था, लेकिन खुद शिवपाल समेत किसी भी उम्मीदवार की जमानत नहीं बच सकी थी. संसदीय चुनाव के नतीजों के बाद शिवपाल सिंह यादव समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने की पेशकश करने लगे. इसके बाद शिवपाल सिंह के समर्थक तरह-तरह की चर्चा भी करने में जुट गए, लेकिन समय-समय पर शिवपाल सिंह यादव अपने भतीजे अखिलेश यादव पर इशारों ही इशारों में तंज कसना नहीं भूलते. वहीं, अखिलेश यादव साफ कह चुके हैं कि जसवंतनगर सीट पर शिवपाल के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारेंगे, लेकिन उनकी पार्टी के साथ गठबंधन करने को तैयार नहीं है.

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपनी खोए हुए राजनीतिक आधार को दोबारा से पाने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटे हैं. उन्होंने तमाम छोटे दलों से गठबंधन करने के साथ-साथ जनसभाएं भी शुरू कर दी हैं, लेकिन शिवपाल को लेकर नरम रुख नहीं अपनाया है. वहीं, शिवपाल यादव भी सक्रिय हैं और 2022 के चुनाव में सपा से गठबंधन करने के बयान तो दे रहे हैं, लेकिन अपनी पार्टी के विलय को लेकर तैयार नहीं हैं. चुनाव को देखते हुए दोनों नेता अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग अलाप रहे हैं.

पंचायत चुनाव को लेकर जहां एक ओर शिवपाल सिंह यादव ने अपने भतीजे और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव को एक बार फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने का आशीर्वाद दिया है. साथ ही 2022 के विधानसभा चुनाव में शिवपाल ने अपने समर्थकों को तैयार रहने के भी संकेत दिए. वहीं, अखिलेश ने पूरे परिवार को जोड़कर यह बता दिया कि नेताजी भले ही इस बार सैफई न आएं हों, लेकिन पूरा परिवार उनके साथ है. इस तरह से चाचा-भतीजे के बीच शह-मात का खेल जारी है.