ग्रेजुएशन की फाइनल ईयर की परीक्षा कराने के यूजीसी के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. इस बहस में महाराष्ट्र सरकार पर राजनीति करने की बात भी आई. आइए जानें सुनवाई में यूजीसी ने क्या दलील दी थी

Final Year Exam पर SC में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित, जानें अपडेट

ग्रेजुएशन की फाइनल ईयर की परीक्षा कराने के यूजीसी के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. इस बहस में महाराष्ट्र सरकार पर राजनीति करने की बात भी आई. आइए जानें सुनवाई में यूजीसी ने क्या दलील दी थी.

Final Year Exam पर SC में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित, जानें अपडेटयूजीसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

यूनिवर्सिटी की फाइनल ईयर परीक्षा कराने के यूजीसी के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को देर तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चली. सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. बता दें कि 30 सितंबर को यूजीसी ने परीक्षा की तारीख तय की थी.

सुप्रीम कोर्ट में ग्रेजुएशन की अंतिम वर्ष की परीक्षा के मामले में आज दिन भर सुनवाई चली. सुनवाई के दौरान UGC ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाया. सुप्रीम कोर्ट में वकील ने कहा कि राज्य सरकार यह नहीं कह सकती कि परीक्षा आयोजित न करें. अधिक से अधिक राज्य सरकार ये कह सकती है कि परीक्षा की तारीख आगे बढ़ा दी जाए.

कोर्ट में यूजीसी के वकील ने महाराष्ट्र सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया. यूजीसी ने दलील दी कि विश्वविद्यालय के कुलपतियों को मई में महाराष्ट्र सरकार द्वारा बैठक के लिए बुलाया गया था. इस बैठक में फैसला लिया गया कि पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को पास किया जा सकता है, लेकिन अंतिम परीक्षा की जरूरी है.

इस बैठक के बाद एक याचिका युवा सेना द्वारा दायर की जाती है जिसकी अध्यक्षता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बेटे ने की. इसी युवा सेना की याचिका के बाद सरकार का भी विचार बदल जाता है और वह परीक्षा के खिलाफ हो गई जबकि राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करने का अधिकार ही नहीं है.यूजीसी के वकील की तरफ से दलील दी गई कि महाराष्ट्र राज्य लोक सेवा परीक्षा सितंबर में आयोजित की जा रही है, जिसमें 2 लाख 20 हजार से अधिक छात्रों के शामिल होने का अनुमान है. जबकि महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों में कुल 10 लाख छात्र हैं. केवल लगभग 2.5 लाख अंतिम वर्ष के छात्र हैं. अगर राज्य लोक सेवा परीक्षा आयोजित की जा सकती है तो अंतिम वर्ष विश्वविद्यालय परीक्षा क्यों नहीं?