कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन तेज़ी पकड़ रहा है। किसानों ने अपनी दिनचर्या को तय कर लिया है। सिंघु बॉर्डर पर किसान सुबह उठ कर सुबह के काम करते हैं फिर नहाने के बाद शब्द कीर्तन करते हैं, तो कुछ किसान चाय और पकोड़े तैयार करने में लग जाते हैं । नाश्ता या खाना खाने के बाद लंगर की तयारी में लग जाते हैं। लंगर की तयारी के बाद शाम को ताश खेलते हैं और उसी के साथ चाय वगेरा भी पीते हैं। कुछ इस तरह से किसानो का दिनचर्ये चलता है।

सिंघु बॉर्डर पर बुज़ुर्ग किसानो की सेवा के लिए कुछ मशीन भी लगायी गयी हैं जिससे उनके कुछ काम आसान हो सके। यहां कई तरह के इंतजाम किये गए हैं जैसे वाशिंग मशीन से लेकर पैर की मालिश करने वाली मशीन तक सभी लगी हैंं। किसानो ने अपने ट्रेक्टर ट्रालियों को घर का रूप देकर रहने के लिए तैयार करलिया है। खाद्य सामग्री से लेकर सोने तक की व्यवस्था ट्राली के अंदर कर्ली गयी है तो किसी को सड़क पर सोना होता है तो वह गद्दे या वाटर प्रूफ टेंट का इस्तेमाल करता है।

दिन भर का काम करने के बाद जब किसान रात का खाना खा कर फरिक होते हैं तोह अपने घर पर बात करते हैं ताकि उनके घरवाले सुकून से सो सके और उनको कोई चिंता न रहे। घर पे बात करने के बाद ज़्यादातर किसान आपस में बैठ कर किसान आंदोलन और कृषि कानून को लेकर चर्चा करते हैं। इस तरह से धरनास्थल पर किसानों की दिनचर्या चल रही है।