प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले महीने 26 मार्च को बांग्लादेश की यात्रा के दौरान वहां हिफाजत-ए-इस्लाम नाम के संगठन ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किए थे. बांग्लादेश के चटगांव और ब्राम्ह्णबरिया में इस कट्टरपंथी संगठन के विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों की कार्रवाई में करीब एक दर्जन लोगों की मौत हो गई थी. पीएम मोदी की बांग्लादेश यात्रा के दौरान कई दिनों तक प्रदर्शन करने वाला हिफाजत-ए-इस्लाम फिर से सुर्खियों में है. इस संगठन के संयुक्त महासचिव एक रिसॉर्ट में महिला के साथ पकड़े जाने के बाद से मामले को दबाने में लगे हैं तो वहीं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ऐसे लोगों को इस्लाम के नाम पर कलंक बताया है.

कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम के संयुक्त महासचिव मामूनुल हक के रिसॉर्ट में एक महिला के साथ पकड़े जाने पर बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने इस संगठन को इस्लाम के नाम पर कलंक बताया है. मामूनुल हक जिस महिला के साथ पकड़े गए थे, उसे उन्होंने अपनी दूसरी पत्नी बताया.

ढाका ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, असल में हिफाजत-ए-इस्लाम के संयुक्त महासचिव मामूनुल को शनिवार को बांग्लादेश के सोनारगांव के एक रिसॉर्ट में एक महिला के साथ रंगे हाथों पकड़े गए थे. अब वह इस मामले में लीपा-पोती करने की हर मुमकिन कोशिश में लगे हुए हैं. मामूनुल ने रिसॉर्ट में एंट्री के दौरान ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली महिला का परिचय दूसरी पत्नी के रूप में बताया था.

बहरहाल, इस घटना के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि हिफाजत-ए-इस्लाम ने इस्लाम को शर्मसार किया है. प्रधानमंत्री ने रविवार को संसद के 12वें सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही. देशभर में हिंसक प्रदर्शन करने वाले हिफाजत-ए-इस्लाम का जिक्र करते हुए पीएम शेख हसीना ने कहा, ‘मैं उनके (हिफाजत के महासचिव) चरित्र के बारे में बात नहीं करना चाहती. लेकिन आप सबने अपनी आंखों के सामने देखा कि वह शनिवार को अपवित्र काम करते हुए पकड़े गए जबकि वह हमेशा कर्म और धर्म की बात किया करते हैं.’

बांग्लादेश की PM शेख हसीना ने कहा, ‘देशभर में हिंसक प्रदर्शनों को अंजाम देने के बाद मामूनुल मौज-मस्ती करने के लिए एक खूबसूरत महिला के साथ रिसॉर्ट गए. वह इस्लाम के नाम पर कलंक हैं. वे लोग इस्लाम को शर्मसार कर रहे हैं.’

पीएम ने सवाल किया कि इस्लाम मानने वाला कैसे कोई शख्स झूठ बोल सकता है? ऐसे लोग धर्म का क्या पालन करेंगे और लोगों को क्या सिखाएंगे? शेख हसीना ने कहा कि ऐसे ही कुछ लोगों की करतूतों के चलते चरमपंथियों, आतंकवादियों और चरित्रहीन लोगों का नाम अब इस्लाम के साथ जुड़ गया है. उन्होंने कहा कि वे लोग शांति के धर्म इस्लाम को सिर्फ दूषित कर रहे हैं. उन्होंने हिफाजत से यह समझने का आग्रह किया कि वे जानें कि उनके पास कैसा नेतृत्व है?

गौर करने वाली बात है कि हिफाजत-ए-इस्लाम पिछले कुछ वर्षों में प्रभावशाली हुआ है. बांग्लादेश में उसका सियासी तौर पर दबदबा भी बढ़ा है. इस संगठन ने धर्मनिरपेक्षता की वकालत करने वाली बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की नाक में दम कर रखा है. महिलाओं के अधिकारों को लेकर बिल हो या बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्षता की बहाली को लेकर संविधान में संशोधन का मसला, हर मौके पर यह संगठन शेख हसीना की सरकार के फैसलों के विरोध में खड़ा नजर आता है. अब महिला के साथ पकड़े जाने पर पीएम ने निशाना साधा है.

इस्लाम का रक्षक मानने वाले हिफाजत-ए-इस्लाम की स्थापना 2010 में की गई थी. 2008 में बांग्लादेश की सरकार ने महिलाओं के संपत्ति में बराबर की हिस्सेदारी, विरासत, लोन, जमीन में हिस्सेदारी आदि को लेकर नेशनल विमेन्स डेवेलपमेंट पॉलिसी बिल का मसौदा तैयार किया. 2008 के चुनावों में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने चुनावों में जीत हासिल की. शेख हसीना की सरकार बनने के बाद धर्मनिरपेक्ष लोगों ने संवैधानिक तौर पर धर्मनिरपेक्षता बहाल करने के लिए 50वें संशोधन को निरस्त करने की मांग की जिसे सैन्य शासन के दौरान लागू किया गया था.

मगर बांग्लादेश में हो रहे इन बदलावों को लेकर इस्लामिक कट्टरपंथियों को लगा कि उनका सियासी दायरा सिकुड़ता जा रहा है. इससे बौखलाए बांग्लादेश के कई इस्लामिक गुटों ने हिफाजत-ए-इस्लाम नाम से एक संगठन का गठन किया. फरवरी 2010 में इस संगठन ने चटगांव में महिला बिल के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया और संविधान के 50वें संशोधन को बनाए रखने की वकालत की. तब से लेकर अब तक यह संगठन अपनी बातों को मनवाने के लिए अक्सर विरोध प्रदर्शन करता रहता है.