कोविड-19 की रोकथाम और इलाज में काम आने वाली वैक्सीन, दवाओं, उपकरण और अन्य सामग्री पर जीएसटी में कटौती या छूट दिए जाने की आवश्यकता की समक्षा के लिए मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की अध्यक्षता में आठ मंत्रियों की समिति गठित की गई है. समिति को सिफारिश पेश करने के लिए आठ जून तक का समय दिया गया है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में माल एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद की शुक्रवार को 43वीं बैठक में इस तरह की समिति गठित किए जाने का निर्णय हुआ था. जीएसटी परिषद ने कोविड-19 को लेकर जरूरी सामग्री पर कर की दरों में कोई बदलाव नहीं किया. परिषद ने तय किया था कि कोविड से संबंधित चिकित्सा सामग्री और वैक्सीन आदि पर कर ढांचे की समीक्षा के लिए मंत्रियों का समूह बनाए जाए और उसकी रपट पर विचार कर कदम उठाया जाए. मंत्रियों का समूह आठ जून तक रिपोर्ट पेश करेगी.

समूह करेगा समीक्षा

समूह अपने लिए तय कार्यक्षेत्र के तहत मेडिकल आक्सीजन, पल्स ऑक्सीमीटर, सैनिटाइजर, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर, वेंटिलेटर, पीपीई किट्स, एन-95 और सर्जिकल मास्क और तापमान नापने वाली मशीनों के खरीद-बिक्री पर जीएसटी में कमी या छूट की आवश्यकता की समीक्षा करेगा. समूह कोविड वैक्सीन, कोविड उपचार के लिए दवाएं और कोविड परीक्षण किट्स पर भी जीएसटी दरों में संशोधन की जरूरत पर विचार करेगा.

समूह में गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन भाई पटेल, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पावर, गोवा के परिवहन मंत्री मौविन गोडिन्हो, केरल के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल, ओडिशा के निरंजन पुजारी, तेलंगाना टी हरीश राव और उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को शामिल किया गया है. जीएसटी परिषद की शुक्रवार की बैठक में कुछ गैर-भाजपा राज्यों के जरिए कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर से जीएसटी हटाने की मांग की गई थी.

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने कोविड सामग्री पर जीएसटी घटाने या हटाने की मांग जरूर की है लेकिन केंद्र सरकार के अधिकारियों का मानना है कि ऐसे निर्णय से ग्राहकों को कोई ठोस लाभ नहीं होगा. वर्तामन में घरेलू निर्मित वैक्सीन पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाया जा रहा है जबकि कोविड संबंधित दवाओं और ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर पर 12 प्रतिशत जीएसटी लागू है.