कृषि क़ानून को लेकर केंद्र सरकार कुछ अलग रुख अख्तियार करने जा रही.किसानो से सरकार चार बार बात कर चुकी कोई हल नहीं निकल पाया.उसके बाद केंद्र सरकार ने लिखित रूप MSP जारी रखने की बात कह दी मगर किसान बिल वापिस लेने पर ही अड़े रहे.आज दिन शुक्रवार को किसान आंदोलन की 16वा दिन है और सरकार किसानो के सामने नतमस्तक होदिख रही.क्योकि बात चित भी अब करने से ऐसे कोई फायदा नहीं दिख रहा.

बीजेपी शुक्रवार से देश के अलग-अलग शहरों में 700 प्रेस कॉन्फ्रेंस और चौपाल का आयोजन करेगी.इसके जरिए मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून के फायदों को गिनाया जाएगा और किसानों को इसके बारे में समझाया जाएगा. अब इस फैसले की जवाब किसानो के तरफ से कुछ नहीं आया है .

ऐसे में अब बीजेपी ने पार्टी स्तर पर कृषि कानूनों के मसले को जनता के सामने पेश करने का प्लान बनाया है.बता दें कि बीते दिन ही कृषि कानून पर एक बुकलेट जारी की गई थी, जिसमें तीनों कृषि कानूनों के फायदों को गिनाया गया था. इसके अलावा कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कृषि कानून के फायदे गिनाए थे और किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील की थी.

कृषि कानून के मसले पर बीजेपी ने विपक्ष की दलों पर हमला बोला और कहा की राजनीतिकी पार्टियों को कृषि कानून के फायदे गिनवाने चाहिए लेकिन ऐसा वो ना कर जनता को भड़काने का काम कर रही है .हाल ही में राजस्थान के पंचायत चुनाव और देश के अन्य राज्यों में हुए कुछ चुनावों में मिली जीत के बाद बीजेपी की ओर से इसे कृषि कानून पर समर्थन के तौर पर पेश किया गया. बीते दिनों प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि राजस्थान में दो करोड़ से अधिक किसानों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया