केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक आज ( 1 सितंबर 2020 ) छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के नई शिक्षा नीति 2020 ( new education policy 2020 ) से जुड़े प्रश्नों का जवाब देंगे। शिक्षा मंत्रालय ने आज का पूरा एक दिन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संबंधित सवाल-जवाब के लिए रखा है।

कुछ दिनों पहले डॉ. निशंक ने ट्वीट कर कार्यक्रम की जानकारी दी थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ‘छात्रों! 1 सितंबर को मैं अपने ट्विटर पेज के जरिए नई शिक्षा नीति से जुड़े आपके हर सवाल का जवाब दूंगा। तो आपको किस बात का इंतजार है? हैश टैग #NEPTransformingIndia! के साथ पूछें अपने सवाल।’

इससे पहले डॉ. निशंक ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा था, ‘प्रिय छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों! क्या आपके पास नई शिक्षा नीति से जुड़ा कोई प्रश्न है? अगर है तो आप वह प्रश्न हैश टैग #NEPTransformingIndia का इस्तेमाल कर मेरे साथ शेयर कर सकते हैं। मैं और मेरा मंत्रालय एनईपी को लेकर आपकी उलझनों को सुलझाने के लिए पूरा एक दिन समर्पित करेंगे। आपके प्रश्नों का इंतजार है।’

अगर आप केंद्रीय शिक्षा मंत्री या शिक्षा मंत्रालय से नई शिक्षा नीति को लेकर कोई भी प्रश्न पूछना चाहते हैं तो हैश टैग #NEPTransformingIndia का इस्तेमाल कर कमेंट बॉक्स में अपना सवाल पूछ सकते हैं।

आपको बता दें कि पिछले माह केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी थी। करीब 34 साल बाद आई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई बड़े बदलाव किए गए हैं। मंजूरी मिलने के बाद से अब तक लगातार देश भर के शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, राजनेताओं, छात्रों, अभिभावकों की तरफ से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

यहां जानें नई शिक्षा नीति की 20 खास बातें, कैसे बदल जाएगा स्कूल-कॉलेजों का एजुकेशन सिस्टम

1. स्कूलों में 10+2 खत्म, अब शुरू होगा 5+3+3+4 फॉर्मेंट
अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा एक और कक्षा 2 सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे। इन पांच सालों की पढ़ाई के लिए एक नया पाठ्यक्रम तैयार होगा। अगले तीन साल का स्टेज कक्षा 3 से 5 तक का होगा। इसके बाद 3 साल का मिडिल स्टेज आएगा यानी कक्षा 6 से 8 तक का स्टेज। अब छठी से बच्चे को प्रोफेशनल और स्किल की शिक्षा दी जाएगी। स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप भी कराई जाएगी। चौथा स्टेज (कक्षा 9 से 12वीं तक का) 4 साल का होगा। इसमें छात्रों को विषय चुनने की आजादी रहेगी। साइंस या गणित के साथ फैशन डिजाइनिंग भी पढ़ने की आजादी होगी। पहले कक्षा एक से 10 तक सामान्य पढ़ाई होती थी। कक्षा 11 से विषय चुन सकते थे।

अभी तक सरकारी स्कूल पहली कक्षा से शुरू होते हैं। लेकिन नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद पहले बच्चे को पांच साल के फाउंडेशन स्टेज से गुजरना होगा।  फाउंडेशन स्टेज के आखिरी दो साल पहली कक्षा और दूसरी कक्षा के होंगे।  पांच साल के फाउंडेशन स्टेज के बाद बच्चा तीसरी कक्षा में जाएगा। यानी सरकारी स्कूलों में तीसरी कक्षा से पहले बच्चों के लिए 5 लेवल और बनेंगे।

5 + 3 + 3 + 4 के नए स्कूल एजुकेशन सिस्टम में पहले पांच साल 3 से 8 साल के बच्चों के लिए, उसके बाद के तीन साल 8 से 11 साल के बच्चों के लिए, उसके बाद के तीन साल 11 से 14 साल के बच्चों के लिए और स्कूल में सबसे आखिर के 4 साल 14 से 18 साल के बच्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं।

2. छठी कक्षा से रोजगारपरक शिक्षा
नई शिक्षा नीति को अंतिम रूप देने के लिए बनाई गई समिति का नेतृत्व कर रहे डॉ. कस्तूरीरंगन ने कहा, अब छठी कक्षा से ही बच्चे को प्रोफेशनल और स्किल की शिक्षा दी जाएगी। स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप भी कराई जाएगी। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति बेरोजगार तैयार नहीं करेगी। स्कूल में ही बच्चे को नौकरी के जरूरी प्रोफेशनल शिक्षा दी जाएगी।

3. 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा आसान होगी
दसवीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में बड़े बदलाव किए जाएंगे। बोर्ड परीक्षाओं के महत्व को कम किया जाएगा। कई अहम सुझाव हैं। जैसे साल में दो बार परीक्षाएं कराना, दो हिस्सों वस्तुनिष्ठ (ऑब्जेक्टिव) और व्याख्त्मक श्रेणियों में इन्हें विभाजित करना आदि। बोर्ड परीक्षा में मुख्य जोर ज्ञान के परीक्षण पर होगा ताकि छात्रों में रटने की प्रवृत्ति खत्म हो। बोर्ड परीक्षाओं को लेकर छात्र हमेशा दबाव में रहते हैं और ज्यादा अंक लाने के चक्कर में कोचिंग पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन भविष्य में उन्हें इससे मुक्ति मिल सकती है। शिक्षा नीति में कहा गया है कि विभिन्न बोर्ड आने वाले समय में बोर्ड परीक्षाओं के प्रैक्टिकल मॉडल को तैयार करेंगे। जैसे वार्षिक, सेमिस्टर और मोड्यूलर बोर्ड परीक्षाएं।
नई नीति के तहत कक्षा तीन, पांच एवं आठवीं में भी परीक्षाएं होगीं। जबकि 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं बदले स्वरूप में जारी रहेंगी।