सरकार द्वारा जारी किये गए नए कृषि कानून को लेकर किसानो का गुस्सा दिन पर दिन बड़ता जा रहा है। किसान कृषि कानून को रद्द कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में कृषि कानूनों पर सत्तापक्ष और विपक्षी पार्टियों के बीच तू-तू मै-मै वाली राजनीति शुरु हो गई है।

बीजेपी देश भर में कृषि कानूनों पर जनसमर्थन जुटाने के लिए किसान सम्मेलन और चौपाल शुरू कर रही है। वही विपक्षी पार्टी ने किसानो के समर्थन में गांव-गांव पंचायत और जिला मुख्यालय पर धरना देने का कार्य शुरू किया है। इस तरह विपक्षी पार्टिया कानून की खामियों को किसानो के बीच पहुंचाने की तैयारी में हैं। कुल मिलाकर किसानों के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष की सियासत बड़ती होती नजर आ रही है।

किसानों के साथ सुलह की गुंजाइश कम दिखाई दे रही है। इसके चलते बीजेपी ने देश भर में कृषि कानूनों का फायदा किसानों को बताने का बीड़ा उठाया है। बीजेपी ने देशभर में 700 जगाहों पर चौपाल लगाने का ऐलान किया है। बीजेपी इन चौपाल के जरिए किसानों को कृषि कानूनों के बारे में गलतफहमी दूर करने और किसानों को कानून के फायदे गिनाने का काम करेगी ताकि किसान आंदोलन को काउंटर कर सके। बीजेपी के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री से लेकर बीजेपी शासित राज्यों के मंत्री किसान सम्मेलन और चौपाल में शामिल होंगे।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी किसान सम्मेलन का आगाज पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्य के पार्टी प्रभारी राधामोहन सिंह बस्ती जिले से सोमवार को करेंगे। 14 दिसंबर से शुरू होकर यह किसान सम्‍मेलन 18 दिसंबर तक चलेगा। राधामोहन सिंह हर रोज तीन से चार जिलों में किसान सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून को लेकर किसानों में गलत अफवाह फैलायी जा रही है।