कृषि कानून के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को आज 1 महीना हो चला है। अब तक किसान और सरकार के बीच कई दौरे की बातचीत हो चुकी है लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। सरकार किसानो को मनाने में लगी हुई है, सरकार ने कृषि कानून में कई बदलाव करने की भी कोशिश करि है। किसान दिल्ली से सटी सीमाओं पर अपनी मांगो को लेकर इतनी कड़ाके की ठण्ड में भी डटे हुए हैं।

किसानो और सरकार के बीच कृषि कानून के चलते अब तक 6 दौरे की बातचीत हो चुकी है। लेकिन किसी भी दौरे में चर्चा अंत तक नहीं पहुंची। जब किसानों ने कृषि कानून वापस लेने की मांग की तो बातचीत रुकी, लेकिन अब सरकार ने फिर चर्चा को आगे बढ़ाने की कोशिश की है।

गुरुवार को कृषि मंत्रालय की ओर से फिर किसानों को चिट्ठी लिखी गई, इसमें कहा गया कि किसान संगठनों द्वारा सभी मुद्दों का तर्कपूर्ण समाधान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सरकार ने अपनी चिट्ठी में बीते दिनों लिखित संशोधन प्रस्ताव का जिक्र किया, साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम पर सफाई दी। कृषि मंत्रालय के मुताबिक, जिन मुद्दों को किसान संगठनों ने उठाया उसी का जवाब लिखित में दिया गया लेकिन अन्य मुद्दे भी हैं तो चर्चा के लिए तैयार हैं।

सरकार ने अपनी चिट्ठी में साफ़ लिखा है की नए कृषि कानून और MSP में बोहोत अंतर है और नए कानूनों का MSP से कोई लेना देना नहीं है। और इन कानूनों से MSP पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही MSP पर किसी तरह की नई डिमांड रखने से सरकार ने आपत्ति जताई है और चर्चा की बात की है. सरकार ने इसके अलावा विद्युत संशोधन अधिनियम, पराली जलाने के कानूनों को लेकर चर्चा का रास्ता भी खुला रखा है।