पंजाब मलेरकोटला के मुसलमानो ने किसानो के लिए लंगर चलाया। मुसलमानो और किसानो के बीच यह देख कर पता चलता है की एकता से बड़ी ताकत कुछ भी नहीं है। पंजाब का मलेरकोटला सामाजिक सोहार्द का केंद्र माना जाता है। पिछले 25-26 दिनों सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के चलते मुसलमान भी अपना भरपूर समर्थन कर रहे हैं और योगदान दे रहे हैं, बीते दिनों से रोज़ मुसलमानो की ओर से किसानो के लिए लंगर चलाया जा रहा है, अच्छे से अच्छा खाने पीने का इंतेज़ाम कराया जा रहा है।

वहा के एक किसान ने बताया की मुसलमानो द्वारा किसानो के लिए मीठे और नमकीन पुलाओ का इंतेज़ाम होता है। मीठा पुलाओ जिसको “ज़र्दा” कहा जाता है, आंदोलन में कई लोगो का पसंदीदा पकवान बन चूका है। मलेरकोटला के इन लोगों के द्वारा ये व्यवस्था सिंघु बॉर्डर पर, संयुक्त किसान मोर्चा के मुख्य मंच के पास ही की जा रही है।

पंजाब में एक दुकान चलाने वाले मोहम्मद जमील का कहना है की ”ये मलेर कोटला की धरती है जब गुरु गोविंद सिंह के छोटे बच्चों को सरान्ध के सूबेदार ने अत्याचार करने की कोशिश की तो मलेरकोटला के नवाब ने मदद की थी। हम भी उसी धरती से है। हम अपने सिख भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर के चल रहे हैं। यहां पर किसानों को नमकीन जर्दा और मीठा जरदा बना करके खिलाया जा रहा है। हाजी मोहम्मद जमील ने किसान कानून को लेकर कहा कि सरकार को पीछे हटना पड़ेगा, सरकार जब तक अपना कानून वापस नहीं लेगी तब तक हम लोग ऐसे ही यहां पर डटे रहेंगे।”

मुख्य मंच के पास चलाए जा रहे लंगर में एक किसान ने बताया “पिछले 25- 26 दिनों से ये लोग ऐसे ही यहां पर खाना खिला रहे हैं। मैं किसान हूं और सरकार की जिद की वजह से इस तरीके से यहां पर किसान रुके हुए हैं। सर्द मौसम होने के साथ-साथ यहां परेशानियां भी हो रही है लेकिन मलेरकोटला के जो मुस्लिम भाई हैं वह हम लोगों की यहां पर सेवा कर रहे हैं। पंजाब के मलेरकोटला से आए मुस्लिम भाइयों का जो लंगर यहां पर चल रहा है, उस लंगर में दिल्ली के भी कुछ मुस्लिम काम कर रहे हैं।”