कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी की अलग-अलग सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन में ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के किसान हैं |

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है. इस बीच राजस्थान के किसानों के ग्रुप ने राजस्थान-हरियाणा के बॉर्डर शाहजहांपुर में जबरन घुसने की कोशिश की. करीब एक दर्जन टैक्टरों ने हरियाणा पुलिस की बेरिकेटिंग तोड़ते हुए हरियाणा में जबरन प्रवेश कर लिया. दर्जन भर से ज्यादा किसानों के ट्रैक्टर पुलिस की बेरिकेटिंग को तोड़कर दिल्ली की तरफ रवाना हो गए. इस दौरान पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े |

सरकार ने कहा है कि इन कानूनों से कृषि क्षेत्र में सुधार होगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी लेकिन प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को आशंका है कि नए कानूनों से एमएसपी और मंडी की व्यवस्था कमजोर होगी और किसान बड़े कारोबारी घरानों पर आश्रित हो जाएंगे |

छठे दौर की बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि पर्यावरण अध्यादेश पर रजामंदी हो गई है. ऐसे में अब पराली जलाना जुर्म नहीं है. साथ ही बिजली बिल का मसला भी सुलझ गया है |

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पहले की तरह इस बार भी बातचीत का वातावरण अच्छा रहा. बैठक में लगभग 50 फीसदी मसलों पर सहमति बन गई है. जिन दो मुद्दों पर रजामंदी नहीं हुई है वो तीनों कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी है. इन दोनों मुद्दों पर चार जनवरी को फिर बातचीत होगी, तब तक किसानों को आंदोलन जारी रहेगा |

बैठक के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने हमारी दो मांगों को मान लिया है. बुधवार की बातचीत अच्छी रही, अब चार जनवरी को अगली वार्ता होगी. शांतिपूर्ण ढंग से किसानों का प्रदर्शन जारी रहेगा |

बुधवार को सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत हुई. चार में से दो मुद्दों पर सहमति बन गई है. इस बीच 31 दिसंबर को होने वाली ट्रैक्टर मार्च स्थगित हो गई है. किसान एकता मोर्चा ने सूचना जारी करते हुए कहा है कि ट्रैक्टर मार्च स्थगित की गई है, कैंसिल नहीं |

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने किसान आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री मोदी से तीन सवाल किए हैं. उन्होंने पूछा है असल में कौन कृषि कानून चाहता है? किसकी तिजोरी भरी जाएगी? और अगर आपने यह कानून हटा दिया तो हार किसकी होगी? किसानों का कहना है कि कृषि कानून से उनका कई फायदा नहीं होगा. कानून बनाने से पहले किसान संगठनों से संपर्क नहीं किया गया |