कृषि कानून को लेकर हरयाणा-पंजाब को मिलकर कई अन्य राज्ये इस कानून का विरोध प्रदर्शन पिछले 3 हफ्तों से कर रहे हैं. ऐसे में बीजेपी सरकार किसानो को मनाने में लगी है की यह नए कृषि कानून उनके फायदे के लिए हैं. इसके चलते किसानो और सरकार के बीच कई बैठक की बातचीत भी हो चुकी लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया है अब तक.लेकिन अब इस विरोध प्रदर्शन के चलते हरयाणा में बीजेपी के अंदर ही कुछ आवाज़ें किसानो के समर्थन में भी उठने लगी है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद चौधरी बीरेंद्र सिंह के हाल ही के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में यह कहकर हलचल पैदा कर दी थी कि उनके लिए पार्टी और राजनीति से बढ़कर किसानों का हित है. उन्होंने कहा कि मैं किसानों की अगुवाई करने के लिए तैयार था. अब किसानों के समर्थन में आज रोहतक में धरना दूंगा. सिंह ने कहा की अगर में किसानो के साथ आजाऊंगा तोह वह पार्टी के खिलाफ नहीं होगा.
इस मामले में संवाद होना चाहिए, जो लाखों किसान आंदोलन कर रहे हैं. किसान की बात करना मेरा धर्म है, अलग मोर्चा अलग पार्टी बनाने के बारे में चौधरी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यह खबरें निराधार है.

बीजेपी नेता बीरेंद्र सिंह ने कहा था की “अगर वे (किसान) मुझसे संपर्क करते, तो मैं किसानों की अगुवाई करने के लिए तैयार था. कृषि कानूनों के बारे में किसानों की शंकाओं को दूर करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि किसानों को लगता है कि कानून उनके लिए हानिकारक हैं.”

हालाकि, बीरेंद्र सिंह ने पक्का नहीं करा है की इस विरोध में शामिल होंगे या नहीं लेकिन समर्थको का कहना है की वह इस विरोध प्रदर्शन में ज़रूर शामिल होंगे.