नई दिल्ली,  आज भारत आजादी की 73वीं वर्षगांठ मना रहा है। बीते दशकों में भारत ने कई मामलों में नई इबारतें लिखी हैं। तस्वीर का एक पहलू यह हैं कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश (Democracy) है, यहां की सभ्यता तकरीबन दस हजार साल पुरानी है। अंग्रेजों के कदम रखने से पहले भारत विश्व का सबसे धनी देश था और यही नहीं दुनिया को विज्ञान से लेकर चिकित्सा तक का इल्म हमने कराया। पर अंग्रेजों ने सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत को लूटा। गुलामी से आजाद होने के बाद भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता यही थी कि कैसे भारत को उसका गौरव वापस दिलाया जाए। इन 73 सालों में हम अपने इस मकसद में मजबूत तरीके से कामयाब हुए हैं।

SAARC देशों में रिजर्व भंडार के मामले में भारत है अव्‍वल

सार्क देशों के रिजर्व भंडार में भारत सबसे अव्वल है। यह बात विश्व बैंक की रिपोर्ट में सामने आई है। आपको बता दें कुल रिजर्व में मौद्रिक सोना, स्पेशल ड्राइंग राइट्स, सोना आदि पैमानों के आधार पर होता है। यह पैमाना सार्क समेत दुनिया के देशों में भारत की आर्थिक तरक्की और मजबूती को दर्शाता है।

1995 के बाद से काफी तेजी से बढ़ा भारत का रिजर्व भंडार

बीते छह दशकों में भारत के रिजर्व भंडार में काफी बढ़ोत्‍तरी हुई है। विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि भारत का 1960 में कुल रिजर्व भंडार 67 करोड़ डॉलर था जो बाद 2019 में बढ़कर 463.47 बिलियन डॉलर हो गया है।

अगर सार्क देशों की बात करें तो कुल भंडार में भारत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और बांग्लादेश से कोसों आगे हैं। भारत के कुल रिजर्व भंडार ने 1995 के बाद काफी तरक्की की है। 1995 में जहां भारत का कुल रिजर्व भंडार 22.86 बिलियन डॉलर था जिसमें लगातार बढ़ोतरी हुई।

कुल भंडार को लेकर जारी आंकड़ों में सोने का पैमाना काफी अहम होता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की कुछ समय पहले आई रिपोर्ट के अनुसार भारत का स्वर्ण भंडार 618.2 टन तक पहुंच गया है। नीदरलैंड में 612.5 टन सोना है। दूसरी तरफ, आर्थ‍िक रूप से परेशान चल रहा पाकिस्तान इस सूची में पिछले कई साल से 45वें स्थान पर बना हुआ है। देशों के लिहाज से देखें तो भारत गोल्ड भंडार की इस सूची में नौवें स्थान पर है। असल में इस सूची में अमेरिका पहले और जर्मनी दूसरे स्थान पर है। गोल्ड भंडार या गोल्ड रिजर्व किसी देश के केंद्रीय बैंक के पास रखा सोना होता है। संकट के दौर में देश के धन की रक्षा और जरूरत पड़ने पर लोगों के धन की वापसी के लिहाज से केंद्रीय बैंक यह खरीद करते हैं।

आपको बता दें कि इसी साल जून माह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार इतिहास में 500 अरब डॉलर के पार हो गया था। बीते कुछ सालों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से वृद्धि हुई है। विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में भारत ने रूस और दक्षिण कोरिया को पछाड़ दिया है। चीन और जापान जैसे मुल्क ही विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में सबसे आगे हैं।