कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण घर में बंद युवाओं से भारतीय शेयर बाजार को बड़ा सहारा मिला रहा है। कोविड के कारण वेतन में कटौती की भरपाई करने के लिए युवा वर्ग शेयर बाजार में जमकर ट्रेडिंग कर रहे हैं। इससे इस संकट की घड़ी में बाजार को संभलने में बड़ी मदद मिली है।

पूजी बाजार नियामक सेबी के डाटा के अनुसार, अप्रैल से लेकर 30 जून तक 24 लाख नए डीमैट खाते खोले गए हैं। वहीं, बीते छह महीने में 39 लाख नए डीमैट खाते खोले गए हैं जिससे कुल खातों की संख्या बढ़कर 4.32 करोड़ हो गई है। रिपोर्ट से यह साफ पता चला है कि मौजूदा समय में शेयर बाजार में दिलचस्पी लेने में सबसे आगे वो युवा निवेशक हैं जिन्हें आमतौर पर अपने करियर की वजह से अभी तक मार्केट में पैसा लगाने का वक्त ही नहीं था।

कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण घर में बंद युवाओं से भारतीय शेयर बाजार को बड़ा सहारा मिला रहा है। कोविड के कारण वेतन में कटौती की भरपाई करने के लिए युवा वर्ग शेयर बाजार में जमकर ट्रेडिंग कर रहे हैं। इससे इस संकट की घड़ी में बाजार को संभलने में बड़ी मदद मिली है।

पूजी बाजार नियामक सेबी के डाटा के अनुसार, अप्रैल से लेकर 30 जून तक 24 लाख नए डीमैट खाते खोले गए हैं। वहीं, बीते छह महीने में 39 लाख नए डीमैट खाते खोले गए हैं जिससे कुल खातों की संख्या बढ़कर 4.32 करोड़ हो गई है। रिपोर्ट से यह साफ पता चला है कि मौजूदा समय में शेयर बाजार में दिलचस्पी लेने में सबसे आगे वो युवा निवेशक हैं जिन्हें आमतौर पर अपने करियर की वजह से अभी तक मार्केट में पैसा लगाने का वक्त ही नहीं था।

बाजार में बड़ी गिरावट से आकर्षित हुए
कोरोना संकट के कारण 23 मार्च को शेयर बाजार निचले स्तर पर पहुंच गया था। सेंसेक्स टूटकर 25,981 और निफ्टी 7600 के आसपास पहुंच गया था। इसके चलते अच्छी कंपनियों के शेयरों में भी 50 फीसदी तक गिरावट आई थी। इस मौके का फायदा उठाने के लिए बाजार में पहली दफा निवेश करने वाले छोटे निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी। इसमें सबसे अधिक मिलेनियल्स (24 से 40 साल) की संख्या थी। मिलेनियल्स ने एक्स्ट्रा आय के लिए डीमैट खाता खोलर शेयर बाजार में ट्रेडिंग शुरू किया।

महानगरों के युवा सबसे आगे 
कोरोना महामारी के बीच दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद जैसे शहरों में युवाओं के बीच शेयर बाजार काफी लोकप्रिय हुआ है। सिर्फ मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु से 30 फीसदी नए निवेशक जुड़े हैं। आलम ये है कि अप्रैल महीने में शौकिया तौर पर ट्रेडिंग करने वाले अब पूरा रिसर्च वर्क कर रहे हैं। युवा निवेशक बाकायदा पूरे दिन बाजार के हर चाल पर नजर रख रहे हैं। उसी के हिसाब से शेयर्स की खरीद परोख्त को अंजाम दे रहे हैं।

चार महीने में 45 फीसदी का उछाल 
शेयर बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च के निचले स्तर से बाजार में 45 फीसदी की रिकवरी आ गई है। ऐसा बाजार में निवेश बढ़ने से हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों में रिटेल होल्डिंग पिछले साल की जून तिमाही में 6.45% थी जो अब इस साल जून तिमाही में बढ़कर 6.74% हो गई है। एनएसई पर सूचीबद्ध 1018 कंपनियों में रिटेल होल्डिंग 28 फीसदी बढ़ी है। हालांकि, यह खतरे का संकट है। बाजार में कभी भी बड़ी गिरावट आ सकती है।