गुलाब के फूलों का मौसम यूं तो सर्दियों में होता है और खासतौर पर फरवरी-मार्च में। लेकिन इस फूल की नाजुक पंखुड़ियों से तैयार गुलकंद को सालभर उपयोग किया जा सकता है। हालांकि तैयार गुलकंद को सालभर सहेजना आसान नहीं होता है, लेकिन अगर नहीं तो यहां जानें कि कैसे शारीरिक और मानसिक सेहत को बनाए रखते हैं गुलाब के फूल…

कैसे बनाया जाता है गुलकंदगुलाब के फूलों की ताजा पंखुडियों को शक्कर या शुगर के मिलकार गुलकंद तैयार किया जाता है। जबकि आप इसे शहद के साथ मिलाकर भी तैयार कर सकते हैं। जब गुलाब की पंखुडि़यों को शुगर में मिलाकर 2 या 3 दिन के लिए हल्की धूप में रखते हैं तो शुगर और गुलाब की पंखुड़ियों का प्राकृतिक पानी मिलकर एक स्वादिष्ट पेस्टी फूड तैयार करते हैं। इसे ही गुलकंद कहा जाता है।

आयुर्वेद में गुलकंद का महत्व
आयुर्वेद में गुलकंद को औषधि की संज्ञा दी गई है। कई दवाइयों या कुछ खास बीमारियों में प्रभाव बढ़ाने के लिए गुलकंद खाने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद में फूलों के रस और उनके अलग-अलग गुणों का उपयोग अलग-अलग तरह की बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है। आमतौर पर गुलकंद खाने का मौसम सर्दी को माना जाता है। इसकी एक वजह यह भी है कि इस मौसम में गुलाब के फूलों की खेती होती है और बड़ी में मात्रा में ताजा गुलकंद खाने के लिए उपलब्ध होता है।