भारत के वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय ने कहा है कि सरकार जीएसटी दरों में कटौती कर सकती है, लेकिन यह तभी संभव हो पाएगा जब टैक्स के आधार में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जीएसटी के तहत फार्म की संख्या को भी कम करने पर काम कर रही है। औद्योगिक संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम में पांडेय ने कहा कि सभी टैक्सपेयर्स उचित तरीके से टैक्स का भुगतान करते हैं और टैक्स का आधार बढ़ जाता है, तो निश्चित रूप से टैक्स की दरों में कटौती की गुंजाइश है।

उन्होंने बताया कि जीएसटी से पहले 17 प्रकार के अलग-अलग टैक्स के लिए कारोबारियों को 495 फार्म भरने पड़ते थे जो जीएसटी काल में 17-18 फार्म तक सीमित हो गए। उन्होंने कहा कि सरकार अब इस संख्या को भी कम करने पर काम कर रही है। पांडेय ने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर प्राप्त होने वाले सभी आंकड़े उत्साहजनक हैं और ये आंकड़े अर्थव्यवस्था के जल्द ही पटरी पर लौटने के संकेत दे रहे हैं।

चालू वित्त वर्ष में बजट लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं

फिक्की के कार्यक्रम में आर्थिक मामलों के सचिव तरुण बजाज ने कहा कि कोरोना महामारी की वजह से चालू वित्त वर्ष 2020-21 में बजट के लक्ष्य को हासिल करना मुमकिन नहीं दिख रहा है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर हालात उतने भी खराब नहीं रहेंगे जितना बाहर की एजेंसियां दिखा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अर्थव्यस्था पर नजर रखने के लिए 14-15 मानकों की लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह साल हमारे लिए नुकसान वाला साल साबित हो सकता है, लेकिन अगले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में वी-शेप रिकवरी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोत्साहन के लिए और कर्ज लेने से परहेज नहीं करेगा।