वैश्विक बाजारों में आज 2,000 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर उठकर सोने की कीमतों में नई तेजी आई। वहीं घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर सोना वायदा 0.45 फीसदी की वृद्धि के बाद 54,797 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। जनवरी 2018 में 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 30 हजार रुपये थी। जनवरी 2019 में यह करीब 32500 रुपये हो गई। जनवरी 2020 में करीब 39100 रुपये अब इसमें लगातार तेजी देखी जा रही है।

इन कारकों से बढ़ रही कीमत
दरअसल अनिश्चितता के समय में सोने की कीमत बढ़ जाती है। कोरोना वायरस महामारी के काल में बैंकों का ब्याज दर कम होना, रियल इस्टेट में आउटपुट कम मिलना, शेयर मार्केट की गिरावट और म्यूचुअल फंड्स में निवेश से मुनाफे की अनिश्चितता के कारण सोने की कामग बढ़ी है। ऐसे में सोना निवेश का एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। निवेशकों का सोने के प्रति आकर्षण बढ़ा है, लेकिन कीमत भी आसमान छू रही है।

कोरोना वायरस से ना सिर्फ भारत, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। लोगों को कोरोना की दूसरी लहर की आशंका है। इसके साथ ही अमेरिका में ब्याज दर का शून्य पर पहुंचना अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव और अन्य वैश्विक राजनीतिक तनाव के कारण भी सोने की कीमतें प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं, अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए देशों ने आर्थिक पैकेज का एलान किया है, जिससे विभिन्न देशों की मुद्राओं की कीमत घटी है डॉलर की तुलना में सोने का महत्व बढ़ गया है।

इतनी रही सोने की मांग
विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अप्रैल-जून की तिमाही में सोने की मांग 70 फीसदी घटकर 63.7 टन रह गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 की वजह से देश में लागू लॉकडाउन के चलते सोने की मांग में गिरावट आई है। इससे पिछले साल यानी 2019 की दूसरी तिमाही में भारत में सोने की मांग 213.2 टन रही थी।

मूल्य के हिसाब से आभूषणों की मांग 63 फीसदी घटकर 18,350 करोड़ रुपये रह गई, जो 2019 की समान अवधि में 49,380 करोड़ रुपये थी। इसी तरह निवेश के लिए सोने की मांग 56 फीसदी घटकर 19.8 टन रह गई, जो एक साल पहले समान अवधि में 44.5 टन थी। मूल्य के हिसाब से सोने की निवेश मांग 37 फीसदी घटकर 8,250 करोड़ रुपये रह गई, जो इससे पिछले साल की समान तिमाही में 13,040 करोड़ रुपये थी।

वैश्विक मांग में भी कमी
वैश्विक स्तर पर सोने की मांग अप्रैल-जून की तिमाही में 11 फीसदी घटकर 1,015.7 टन रह गई। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। हालांकि, इस अवधि में निवेश श्रेणी में पीली धातु की मांग में उल्लेखनीय इजाफा हुआ। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-जून की अवधि में सोने की कुल मांग घटकर 1,015.7 टन रह गई, जो इससे पिछले साल की समान अवधि में 1,136.9 टन रही थी।

निवेश के रूप में बढ़ी मांग
हालांकि, निवेश के रूप में इसकी मांग बढ़ी है। इस अवधि में निवेश के लिए सोने की मांग 98 फीसदी बढ़कर 582.9 टन रही, जो 2019 की समान तिमाही में 295 टन रही थी। निवेश श्रेणी की बात की जाए, तो सोने की छड़ ओर सिक्कों की मांग 32 फीसदी घटकर 148.8 टन रह गई, जो 2019 की दूसरी तिमाही में 218.9 टन रही थी।

ईटीएफ की मांग में 300 फीसदी की बढ़ोतरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान सोने और इसी तरह के अन्य उत्पादों में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) की मांग 300 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी के साथ 434.1 टन पर पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 76.1 टन थी। तिमाही के दौरान वैश्विक स्तर पर आभूषणों की मांग 53 फीसदी घटकर 251.5 टन रह गई, जो एक साल पहले समान अवधि में 529.6 टन थी। प्रौद्योगिकी में सोने की मांग 18 फीसदी घटकर 80.7 टन से 66.6 टन रह गई।

मालूम हो कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता देश है। भारत के आयात बिल में सोने के आयात का बड़ा हिस्सा शामिल है। 2018-19 में सोने का आयात 33 अरब डॉलर मूल्य का रहा था। वहीं 2019-20 में आयात करीब 31 अरब डॉलर मूल्य का रहा है।