कृषि कानून के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को 15 दिन हो चले हैं , अब तक कोई निश्चित समाधान नहीं निकला है। सरकार द्वारा किसानो को मानाने के लिए सरकार अब तक 6 दौरे की बातचीत हो चुकी है और बुधवार को सरकार द्वारा भिजवाए गए लिखित प्रस्ताव को भी ख़ारिज करदिया गया है। भारत सरकार ने कृषि कानून में संशोधन करके 22 पन्नो का लिखित प्रस्ताव किसानो को भेजा था , जिसको पढ़ने के बाद किसानो में तनाव कम होने वजाये बढ़ता दिख रहा है। किसानो ने इस लिखित प्रस्ताव को सिरे से ख़ारिज करदिये और साथ ही एलान भी किया की आंदोलन अब नहीं रुकेगा , अब आंदोलन को और बढ़ाया जायेगा। अब जयपुर-दिल्ली और आगरा-दिल्ली हाईवे समेत तमाम नेशनल हाईवे जाम किए जाएंगे। इसके साथ ही किसानो को सरकार के दूसरे प्रस्ताव का भी इंतज़ार रहेगा।

किसान कृषि को कानून को वापस करने की ज़िद पर अड़े है तो सरकार भी कृषि कानून को लागु करने में पीछे नहीं हैट रही है। दोनों ही पक्ष अपनी अपनी ज़िद पर डटे हुए हैं। केंद्रीय खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे का कहना है की चल रहे किसान आंदोलन में पाकिस्तान और चीन का समर्थन है। रावसाहेब ने कहा कि पहले CAA और NRC को लेकर मुसलमानों को भड़काया गया। ये कोशिशें नाकाम रही तो, अब कृषि कानून को लेकर किसानो को भाड़काया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने यह बात बुधवार को औरंगाबाद में हेल्थ सेंटर के इनॉगरेशन प्रोग्राम में कही।

किसानों ने सरकार से पूछा था की यह कानून किसकी सिफारिश पर लाया गया । सरकार ने लिखित में दिया है कि 2010 में हरियाणा के उस वक्त के मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की लीडरशिप में कमेटी बनी थी। सरकार ने हुड्डा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के नामों का ही जिक्र किया है, जबकि कमेटी में बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी शामिल थे।