सुप्रीम कोर्ट में लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई है। चीफ जस्टिस ने सबसे पहले पूछा कि हरीश साल्वे किसकी ओर से पेश हो रहे हैं और भारतीय किसान यूनियन की ओर से कौन पेश हो रहा है। चीफ जस्टिस ने सुनवाई शुरू करते ही कहा की अभी कानून पर चर्चा नहीं होगी, शुरुआत में सिर्फ प्रदर्शन को लेकर बहस होगी। कानून वैध हैं या नहीं, इसपर बाद में बहस हो सकती है।

सबसे पहले हरीश साल्वे ने पक्ष रखा था। हरीश साल्वे ने बयान देते हुए कहा की इस आंदोलन के चलते दिल्लीवासी बहुत प्रभावित हुए हैं। अगर सड़के इसी तरह से बंद रही तो दिल्लीवासियों को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। चीफ जस्टिस ने इस मसले पर कहा की एक मसले के चक्कर में दूसरे की जीवन पर असर नहीं पड़ना चाहिए।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि किसानों को प्रदर्शन का हक है, लेकिन ये कैसे हो इसपर चर्चा हो सकती है। अदालत ने कहा कि हम प्रदर्शन के अधिकार में कटौती नहीं कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन का अंत होना जरूरी है, हम प्रदर्शन के विरोध में नहीं हैं लेकिन बातचीत भी होनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें नहीं लगता कि किसान आपकी बात मानेंगे, अभी तक आपकी चर्चा सफल नहीं हुई है इसलिए कमेटी का गठन जरूरी ह। अटॉर्नी जनरल ने अपील की है कि 21 दिनों से सड़कें बंद हैं, जो खुलनी चाहिए। वहां लोग बिना मास्क के बैठे हैं, ऐसे में कोरोना का खतरा है।

सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन को लेकर सुनवाई टाल दी गयी है। अदालत में किसी किसान संगठन के मौजोदड न होने के कारण फैसला नहीं हो पाया। कोर्ट का कहना है की फैसला तब ही सुनाएंगे जब किसान भी अदालत में मौजूद होंगे। आगे इस मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी. सुप्रीम कोर्ट में सर्दियों की छुट्टी है, ऐसे में वैकेशन बेंच ही इसकी सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार को मौजूदा कृषि कानूनों को होल्ड पर रखने पर विचार करना चाहिए। अब केस पर अगले हफ्ते सुनवाई की जाएगी।