1. बीसीसीआई की एसओपी के मुताबिक, 60 साल से ज्यादा उम्र के अंपायर, कोच, सपोर्ट और ग्राउंड स्टाफ के मैदान पर जाने की मनाही है
  2. अरूण लाल की कोचिंग में ही इस साल मार्च में बंगाल ने रणजी ट्रॉफी फाइनल खेला था
  3. भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने रविवार को घरेलू क्रिकेट की बहाली के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया। इसके तहत 60 साल से ज्यादा उम्र के ग्राउंड स्टाफ, अंपायर्स, ऑफिशियल्स और कोच ट्रेनिंग कैंप का हिस्सा नहीं रह सकते हैं। इस नियम के तहत बंगाल टीम के कोच अरूण लाल और बड़ौदा के कोच डेव वाटमोर टीम को ट्रेनिंग नहीं दे पांएगे।66 साल के वाटमोर को इसी साल अप्रैल में बड़ौदा का कोच और क्रिकेट डायरेक्टर बनाया गया था, जबकि 65 साल के अरूण लाल की कोचिंग में इसी साल मार्च में बंगाल ने रणजी ट्रॉफी का फाइनल खेला था।बीसीसीआई ने एक दिन पहले कोरोना गाइडलाइन जारी की

    बीसीसीआई के 100 पेज के एसओपी के मुताबिक, 60 साल से ज्यादा उम्र के सपोर्ट स्टाफ, अंपायर, कोच, ग्राउंड स्टाफ के अलावा ऐसे व्यक्ति जिन्हें डायबिटीज, फेफड़ों की बीमारी, कमजोर इम्युनिटी या फिर किसी दूसरी तरह की स्वास्थ्य परेशानी है, उनके कोरोना से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में सरकार के निर्देशों के मुताबिक इन लोगों को मैदान पर जाने की इजाजत नहीं होगी।

    वाटमोर का टीम से जुड़ना मुश्किल: बीसीए

    इस मामले पर बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के एक ऑफिशियल ने सोमवार को न्यूज एजेंसी को बताया कि एसओपी के बाद ऑस्ट्रेलियन कोच डेव वाटमोर का हमारी टीम से जुड़ना मुश्किल दिख रहा है। बोर्ड ने 60 साल से ज्यादा उम्र के कोच के मैदान पर जाने पर रोक लगाई है।

    किसी भी टीम के लिए नियमों का उल्लंघन मुश्किल: बीसीसीआई

    वहीं, इस मामले पर बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यह एसओपी है। किसी भी टीम के लिए नियमों का उल्लंघन बेहद मुश्किल होगा। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अरूण लाल या वाटमोर जैसे कोच को बाहर रहना होगा।

    खिलाड़ियों की सुरक्षा स्टेट एसोसिएशंस की जिम्मेदारी होगी

    बोर्ड ने राज्य क्रिकेट एसोसिएशंस से कहा कि देश में कोरोना की स्थिति के हिसाब से इस गाइडलाइन में बदलाव होता रहेगा। सभी एसोसिएशंस को इसका हर हाल में पालन करना है। किसी भी तरह की ट्रेनिंग या प्रैक्टिस शुरू करने से पहले सभी क्रिकेट संघों को स्थानीय प्रशासन से मंजूरी लेना जरूरी होगा। खिलाड़ियों, स्टाफ और स्टेक होल्डर्स की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्टेट क्रिकेट एसोसिएशंस की होगी।