दिल्ली-एनसीआर के कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने हल्के से मध्यम लक्षणों के हाई रिस्क वाले कोविड मरीजों के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी की पेशकश शुरू कर दी है. इस इलाज में कासिरिविमैब और इमडेविमैब के कॉम्बिनेशन का उपयोग किया जाता है जिसे आमतौर पर ‘एंटीबॉडी कॉकटेल’ कहा जाता है. यह अब भारत में भी उपलब्ध है. रोश इंडिया और सिप्ला ने सोमवार को देश में इसकी लॉन्चिंग की घोषणा की थी.

हालांकि, इसकी एक डोज की कीमत 59,750 रुपये होने से इस ट्रीटमेंट की पहुंच लिमिटेड होगी. इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने गुरुवार को इससे इलाज की पेशकश शुरू की. अपोलो हॉस्पिटल्स के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अनुपम सिब्बल ने कहा “इसको जल्दी दिया जाना चाहिए  और आइडली हम इसे मरीज के पॉजिटिव होने के 48-72 घंटों के भीतर देना चाहेंगे, लेकिन इसे एक सप्ताह के भीतर दिया जा सकता है. ”

एंटीबॉडी कॉकटेल मृत्यु के जोखिम को करता है कम 

एंटीबॉडी कॉकटेल से अस्पताल में भर्ती और मृत्यु के रिस्क को कम करने के लिए दिया जाता है. अस्पतालों के अनुसार, यह उन लोगों को दिया जा सकता है जिन्हें गंभीर कोविड डिजीज की हाई रिस्क है. जैसे 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या सीओपीडी के साथ 55 वर्ष से अधिक आयु के लोग,गुर्दे की बीमारी,  मधुमेह मेलिटस वाले लोग इसमें शामिल हैं.

84  साल के कोरोना मरीज का किया इलाज

फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट, ओखला में इससे इलाज किया जाएगा. वहीं, गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल इस दवा से इलाज कराने वाले अपने पहले मरीज को छुट्टी दे दी. एक 84 वर्षीय व्यक्ति के मंगलवार को यह दवा दी गई थी.

वहीं, दिल्ली सरकार के लोक नायक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ सुरेश कुमार ने कहा कि उनके अस्पताल में दवा पर विचार नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा “यह बहुत महंगा है, हम इसके बारे में नहीं सोच रहे हैं. यह अमीर लोगों के लिए है और यह एक एक्सपेरिमेंटल दवा भी है.”