ईरानी वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह का कत्ल कर दिया गया. जिस तरीके से कत्ल की इस वारदात को अंजाम दिया गया, वो वाकई में हैरान करने वाला है. फखरीजादेह के कत्ल में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हुआ, उसका इस्तेमाल इससे पहले कहीं नहीं हुआ. चौंकाने वाली बात ये है कि जिस बंदूक से फखरीजादेह का कत्ल किया गया वो तो भले ही ईरान में एक ट्रक पर लगाई गई थी लेकिन उस ट्रक पर गन का ट्रिगर दबाने के लिए कोई इंसान मौजूद नहीं था. बल्कि धरती से लाखों किलोमीटर की दूरी पर आसमान में तैर रही एक सैटेलाइट का इशारा मिलते ही उस गन ने फखरीजादेह को गोलियों से भून डाला।

बताया जा रहा है कि हमले के दौरान फखरीजादेह पर 13 राउंड फायरिंग की गई और सब के सब निशाने अचूक थे यानि जब फायर हुए तो वो एक सेंटीमीटर भी निशाने से इधर-उधर नहीं हुआ. अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि कत्ल में इस्तेमाल किया गया हथियार इतना खतरनाक था कि बचने की कोई गुंजाइश बाकी नहीं छोड़ी गई थी. एजेंसियों की खबरों के मुताबिक फखरीजादेह के कत्ल में हाल में ही बनाई गई गन स्मेश होपर का इस्तेमाल किया गया था।

ईरानी वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह के कत्ल को लेकर पहले अलग-अलग कयास लगाए जा रहे थे. कहीं खबर ये थी कि फखरीजादेह के काफिले पर हमला कर उनको मौत के घाट उतारा गया तो कहीं कहा जा रहा था कि एक ट्रक पर लगी बंदूक से उनको निशाना बनाया गया था. हालांकि अब अधिकारिक तौर पर इस्लामिक रेवलूशन गार्डस कॉर्प्स के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रमजान शरीफ ने दावा किया है कि फखरीजादेह का कत्ल सैटेलाइट से ऑपरेट होने वाले हथियार से किया गया है।

हर कोई हैरान है कि कैसे एक बंदूक का निशाना इतना अचूक हो सकता है कि वो चलती कार में जा रहे एक शख्स की जान ले सके. चौंकाने वाली बात ये भी है कि जब फखरीजादेह का क़त्ल हुआ उस वक़्त उस कार में उनकी पत्नी भी मौजूद थीं जो उनसे कुछ इंच की दूरी पर बैठी हुई थीं लेकिन इस हमले में उनको कोई नुकसान नहीं पहुंचा ।