कोविड के टेस्ट और इलाज के तरीके सुझा रहे याचिकाकर्ता की एक याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट की फटकार सुरेश शॉ नाम के याचिकाकर्ता की फटकार लगाते हुए याचिका खारिज कर दी और उसपर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया. चीफ जस्टिस एनवी रमना और याचिकाकर्ता के बीच की वार्तालाप बड़ी दिलचस्प रही.

दरअसल, याचिकाकर्ता ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से कोरोना के इलाज और दवा के बारे में निर्देश देने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एनवी रमना की बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या आप एक डॉक्टर हैं? याचिकाकर्ता ने कहा, ‘मैं सुरेश शॉ हूं. नहीं, मैं डॉक्टर नहीं हूं.’ बेंच ने पूछा आपको कोविड के बारे में क्या ज्ञान है? इसपर शॉ ने कहा, ये याचिका वैज्ञानिकों की रिसर्च पर आधारित है, न कि मेरे ज्ञान पर.

“एक कॉमर्स का छात्र सिखाएगा कोविड का इलाज कैसे करें?”

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, ‘आप डॉक्टर, मेडिकल छात्र या वैज्ञानिक नहीं हैं. आपको कोविड के बारे में क्या जानकारी है. आपकी योग्यता क्या है?’ याचिकाकर्ता ने कहा, मेरे पास मास्टर्स इन कॉमर्स की डिग्री है. बेंच ने कहा, ‘कॉमर्स? एक कॉमर्स का छात्र दुनियाभर में डॉक्टरों को सिखाएगा कि कोविड का इलाज कैसे करें? इस तरह की तुच्छ दलीलों के लिए हमें कितना हर्जाना लगाना चाहिए. हम इसके लिए 10 लाख का हर्जाना लगाएंगे.’

याचिकाकर्ता ने बताया, ‘मैं बेरोजगार हूं.’ इसके बाद बेंच ने कहा, ‘यह एक तुच्छ याचिका है, जो विषय के बारे में कोई ज्ञान नहीं रखती है. याचिकाकर्ता हमें यह बताना चाहता है कि कोविड के लिए किस प्रकार का टेस्ट और ईलाज किए जाने चाहिए. हम जुर्माना लगाएंगे. हमें कितना जुर्माना लगाना चाहिए?’ याचिकाकर्ता ने कहा मेरे खाते में केवल एक हजार रुपये हैं. फिर बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘ठीक है, फिर आप पर एक हजार रुपये का हर्जाना लगाया जाता है. खारिज.’