कोरोना वायरस के बारे में कई ऐसी जरूरी बातें हैं, जिनके बारे में लोग जानते ही नहीं हैं और ऐसे में वो गलती कर बैठते हैं। यही गलती कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी को घर ला सकती है। इसलिए हम आपके लिए कोरोना से जुड़े कुछ सवालों के जवाब लेकर आए हैं, जिन्हें जानना आपके लिए बेहद ही जरूरी हैं।

कोरोना गॉगल वायरस से कितना सुरक्षित रखता है? 

लोक नायक अस्पताल के डॉ. नरेश गुप्ता के मुताबिक, ‘कोरोना गॉगल उन डॉक्टरों के लिए है, जो कोविड वार्ड में रहते हैं। कोविड मरीजों का इलाज करते हैं और संक्रमितों के पास जाते हैं। जिस तरह से एन-95 मास्क सामान्य लोग नहीं लगा पाते हैं, उन्हें घुटन होने लगती है, उसी तरह यह गॉगल सामान्य लोगों के लिए नहीं है। इससे उनको परेशानी हो सकती है।’

फल-सब्जी पर वायरस के होने की आशंका है तो क्या करें? 
  • इस बारे में डॉ. नरेश गुप्ता कहते हैं, ‘पहली बात अगर फल, सब्जी, मेज, कुर्सी या किसी सतह पर कोरोना वायरस है, तो संक्रमण की संभावना कम रहती है। ऐसी वस्तुओं पर कुछ घंटे रहने के बाद वायरस नष्ट हो जाता है। लेकिन अगर बेचने वाला संक्रमित हुआ या फल-सब्जी पर कोई खांस रहा है, तो वायरस उसपर बैठा रह सकता है। इसलिए ऐसी चीजों को घर लाकर पानी से अच्छी तरह धोएं, या कुछ घंटों या रात भर के लिए अलग रख दें। इससे वायरस नष्ट हो जाता है। इस बीच यह भी ध्यान रखना है कि सामान लाने के बाद साबुन-पानी से हाथ जरूर धोना है।’
  • नेशनल हेल्थ डिजिटल मिशन क्या है? 
    • यह स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण घोषणा है। कुछ साल पहले आयुष्मान भारत योजना आई थी, जिससे गरीब लोगों को काफी फायदा हुआ। उसी तरह नेशनल हेल्थ डिजिटल मिशन से लोगों के हेल्थ रिकॉर्ड्स रखे जाएंगे। हेल्थ डाटा में क्या-क्या शामिल किया जाएगा, यह तय करना अभी बाकी है। इसके आने के बाद अगर किसी को कोई बीमारी होती है तो उसका पूरा रिकॉर्ड होगा, वो भी एक डाटा के रूप में और देश में कहीं भी, कभी भी वो देखा जा सकेगा। इससे मरीज की हिस्ट्री जानने में काफी मदद मिलेगी।’
    • नेशनल हेल्थ डिजिटल मिशन से क्या फायदा होगा? 
      • डॉ. नरेश गुप्ता के मुताबिक, ‘अक्सर लोग जब इलाज कराने जाते हैं तो बीमारी की हिस्ट्री भूल जाते हैं। इससे उनका डेटा उनके पास रहेगा। इसमें उन्हें एक कार्ड मिल सकता है, या कोई भी डिजिटल पास दिया जाएगा, जिसमें उनके हेल्थ का पूरा रिकॉर्ड होगा। खास बात यह है कि आज के समय में टेलीमेडिसिन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके आने से टेलीकंसल्टेशन के दौरान केवल बताना होगा कि क्या परेशानी है, बाकी डॉक्टर उस आईडी से अपने कंप्यूटर पर देख लेंगे। डॉक्टर के पास मरीज के बारे में क्लीनिकल स्टडी करने का मौका भी रहेगा। ये डॉक्टर और मरीज दोनों के लिए बहुत उपयोगी होगा।’