कोरोना से जुड़े सभी पक्षों पर अगर गौर करें तो यह बात साफ है कि कोविड-19 के साथ जीने की हमें आदत डालनी होगी। इसलिए बेहतर तो यही है कि इस वायरस से डरने की जगह हम इसे स्वीकार कर लें। यहां जानिए, आखिर क्यों कही जा रही है यह बात…

कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए दुनियाभर में वैक्सीन और दवाओं को विकसित करने का दौर जारी है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की मानें तो दुनियाभर में करीब 17 वैक्सीन ऐसी हैं, जो अपने परीक्षण के कई स्तर पार करते हुए अब इंसानों पर परीक्षण के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि जानकारी मिलने तक WHO की तरफ से इन वैक्सीन्स में एक भी भारतीय वैक्सीन को सम्मिलित नहीं किया गया था।

हमेशा हमारे साथ रहेगा कोविड-19!
हेल्थ एक्सपर्ट्स और कोविड-19 (Covid-19) पर परीक्षण कर रहे वैज्ञानिकों द्वारा अलग-अलग रिपोर्ट्स में इस बात को स्वीकार किया गया है कि अब कोरोना को हमें स्वीकार कर लेना चाहिए। क्योंकि हो सकता है कोरोना की यह स्ट्रेन, जिससे इस समय पूरी दुनिया प्रभावित है, वह हमेशा-हमेशा हमारे साथ रहे। इसके उपचार के लिए मानव जाति को इसी तरह से टीका और वैक्सीन ईजाद करनी होगी, जिस तरह अन्य बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगाया जाता है।