कोरोना वायरस की ये नई लहर पिछले साल की याद दिला रही है और कई मामलों में उससे भी खतरनाक नज़र आ रही है. क्योंकि अब लॉकडाउन नहीं है और मामलों की रफ्तार बुलेट की तेज़ी से बढ़ रही है.

भारत में एक बार फिर कोरोना वायरस ने अपना विकराल रूप ले लिया है. पिछले कई दिनों से देश में हर रोज 50 हजार से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं. यही कारण है कि कोरोना वायरस की ये नई लहर पिछले साल की याद दिला रही है और कई मामलों में उससे भी खतरनाक नज़र आ रही है. क्योंकि अब लॉकडाउन नहीं है और मामलों की रफ्तार बुलेट की तेज़ी से बढ़ रही है.

भारत में एक बार फिर कोरोना वायरस ने अपना विकराल रूप ले लिया है. पिछले कई दिनों से देश में हर रोज 50 हजार से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं. यही कारण है कि कोरोना वायरस की ये नई लहर पिछले साल की याद दिला रही है और कई मामलों में उससे भी खतरनाक नज़र आ रही है. क्योंकि अब लॉकडाउन नहीं है और मामलों की रफ्तार बुलेट की तेज़ी से बढ़ रही है.

ऐसे में देश में आई कोरोना की पहली और इस लहर में वो क्या अंतर हैं, जो हर किसी की चिंता बढ़ाने का काम कर रही है…

1.    पिछले साल जब कोरोना वायरस आया, तब देश में लॉकडाउन लगा था. ऐसे में अनलॉक के बाद कोरोना केस की रफ्तार बढ़ती गई. सितंबर-अक्टूबर, 2020 के वक्त भारत में 18 हजार से 50 हजार एक्टिव मामले 32 दिन में पहुंच गए थे. लेकिन इस बार 11 मार्च से 27 मार्च के बीच ही ये अंतर पूरा हो गया है.

2.    पहले की तरह ही इस बार भी सबसे अधिक खतरा महाराष्ट्र में देखने को मिला है. पिछले साल जहां 11 हजार से 22 हजार एक्टिव केस पहुंचने में 31 दिन लगे थे, इस बार ये आंकड़ा सिर्फ 9 दिन में पार हो गया है.

3.    महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई कोरोना की घातक वेव का शिकार बनी है. इस बार यहां हर दिन आने वाले कोरोना के केस का आंकड़ा 850 से 2100 तक सिर्फ 24 दिन में पहुंच गया. जबकि पिछले साल यही आंकड़े को छूने में एक महीना लगा था.

4.    महाराष्ट्र जैसा हाल ही गुजरात का भी हुआ है, जहां बीते साल एक नियमित रफ्तार से कोरोना के केस बढ़ रहे थे. जो इस बार बेकाबू हो गया है. गुजरात में इस बार बीते एक हफ्ते से हर रोज 1500+ मामले सामने आ रहे हैं.

5.    उत्तर भारत में पंजाब इस बार चिंता बढ़ा रहा है. यहां बीते एक हफ्ते से हर रोज 2500 से ज्यादा केस आ रहे हैं. चिंता की बात ये भी है कि पंजाब में कोरोना के यूके स्ट्रेन के सबसे अधिक केस हैं.

6.    पंजाब का चंडीगढ़ पूरे प्रदेश का नया एपिसेंटर बनता दिख रहा है. यहां दो दर्जन से अधिक कंटेनमेंट जोन बन गए हैं, जबकि एक्टिव केस भी 1400 तक पहुंच गए हैं. इस बार केस बढ़ने की रफ्तार भी तेज है.

7.    अलग-अलग राज्यों में बढ़ते मामलों का राष्ट्रव्यापी असर भी है. देश में चार दिन के अंदर ही एक लाख से अधिक एक्टिव केस बढ़े हैं, जो पूरे कोरोना काल की सबसे तेज रफ्तार है.

8.    इस बार देश में पांच ऐसे राज्य हैं, जो कोरोना की धुरी बन गए हैं. महाराष्ट्र, केरल, गुजरात, पंजाब, कर्नाटक मौजूदा केस का 70 फीसदी से अधिक हिस्सा रखते हैं. चिंता की बात ये है कि इन जगहों पर हर दिन के साथ रफ्तार और भी तेज हो रही है.

9.    सिर्फ कोरोना के केस ही नहीं बल्कि इससे होने वाली मौतें भी चिंता बढ़ा रही हैं. दिसंबर के बाद ये पहला मौका आया है, जब मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. पिछले करीब एक हफ्ते से देश में हर दिन 200 से अधिक मौत दर्ज हो रही हैं और ये आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है.

10.    कोरोना मामलों की ये रफ्तार चिंता इसलिए भी बढ़ा रही क्योंकि इस बार लॉकडाउन नहीं है. कुछ राज्य फिर से सख्ती की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन लोगों में लापरवाही बढ़ी है. ऐसे में वैक्सीनेशन की रफ्तार भी धीमी है, जो लोगों को टीका लगवाने के लिए लंबा इंतजार करवा रही है.