नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क।कोरोना का कहर जिंदगी को तबाह कर रहा है। इस बीमारी की चपेट में भारत में अब तक 30 लाख से अधिक लोग आ चुके हैं। बीमारी से बचाव का कोई उपाय नहीं है, सिर्फ मास्क ही एक मात्र जरिया है जिसे लोग कोरोना से बचाव के लिए कवच के रुप में इस्तेमाल कर रहे है। कोरोना का कहर ज्यादातर बॉडी ऑर्गन पर असर डाल रहा है। अब एक नए अध्ययन में ये बात सामने आई है कि है यह वायरस इंसान की किडनी, फेफड़े और मस्तिष्क जैसे अंगों में खून के थक्के को भी जमा देता है। द लैंसेट माइक्रोब में प्रकाशित रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है।

द लांसेट माइक्रोब में प्रकाशित अध्ययन का नेतृत्व इंपीरियल कॉलेज लंदन और इंपीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट के शोधकर्ताओं ने किया है। अध्ययन में पाया गया है कि कोरोनावायरस के कारण मरने वाले मरीजों के फेफड़ों और किडनी पर चोट के निशान पाए गए थे। इस स्टडी में 10 मरीजों पर अध्ययन किया गया। हालांकि स्टडी में जांच किए गए मरीजों की संख्या कम थी, लेकिन इसे इंग्लैंड में अब तक कोविड 19 मरीजों के हुए पोस्टमार्टम एग्जामिनेशन की सबसे बड़ी स्टडी कहा जा रहा है।

अध्ययन में 9 मरीजों के अंगों पर मिले खून के थक्के के निशान

स्टडी में 10 मरीजों की जांचें की गईं थीं, जिनमें से 9 मरीजों के कम से कम एक बड़े अंग दिल, फेफड़े और किडनी में थ्रोम्बोसिस (खून का थक्का) मिले। हालांकि टीम 10वें मरीज में थ्रोम्बोसिस की जांच नहीं कर सकी। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस स्टडी से क्लिनीशियन्स को मरीजों के इलाज में मदद मिलेगी।

थ्रोम्बोसिस सर्कुलेट्री सिस्टम खून के सामान्य बहाव को रोकता है, और यह स्ट्रोक और हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। शोधकर्ताओं को अध्ययन में 8 मरीजों को फेफड़ों, 5 मरीजों के दिल और 4 मरीजों की किडनी पर थ्रोम्बी मिला।

सभी मरीजों में रेनल ट्यूब्युलर चोट के सबूत मिले। यह किडनी की चोट होती है। जिसका मुख्य कारण किडनी तक खून का धीमा बहना और गंभीर संक्रमण होता हैं। यह आमतौर पर अस्पताल और आईसीयू में भर्ती मरीजों को प्रभावित करती है।

शोधकर्ताओं को अध्ययन में एक मरीज की बॉडी पर म्यूकर माइकोसिस नाम का फंगल इंफेक्शन भी मिला। म्यूकर माइकोसिस एक तरह का संक्रमण है जो शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित करने के लिए खून के जरिए फैलता है। गंभीर संक्रमण में फेफड़े, दिमाग और किडनी, और दिल शामिल हो सकते हैं।