मध्य प्रदेश के धार जिले में 150 लोगों की टीम ने अद्भुत कारनामा अंजाम दिया है. कोरोना संकट के समय उन्होंने 24 घंटे काम कर 90 दिन के समय को मात्र 4 दिन में ही पूरा कर लिया. उनके साहसिक प्रयास, कड़ी मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट को जीवनदान मिल गया. उनके सफल प्रयास से कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी दूर होने की किसी हद तक संभावना बढ़ गई.

90 दिन के काम को मात्र 4 दिन में 150 लोगों ने बनाया संभव

गौरतलब है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा मारामारी ऑक्सीजन को लेकर हो रही है. पूरे देश भर में ऑक्सीजन की कमी बनी हुई है और ऑक्सीजन की कमी की वजह से हर रोज सैकड़ों मरीजों की जिंदगी खत्म हो रही है. संकट की स्थिति को देखते हुए धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट का ट्रायल प्रोडक्शन भी शुरू हो गया. 24 घंटे शुद्धता जांच के बाद मंगलवार से 30 टन ऑक्सीजन की क्षमता हो जाएगी.

उम्मीद है कि करीब 30 टन ऑक्सीजन अब प्रदेशवासियों को मिल सकेगी. प्लांट को शुरू करने में मुख्य भूमिका जिला प्रशासन और उद्योग विभाग की रही है. सभी जरूरी मंजूरियां हाथों हाथ जारी की गईं. परिवहन को सुगम बनाने के लिए प्लांट तक सड़क भी बनाई गई. इसके लिए कंपनी के मालिक करण मित्तल ने 40 लाख रुपए खर्च किए. मुंबई से ऑक्सीजन मीटर और अहमदाबाद से दूसरी मशीनें मंगवाई गईं.

दिन-रात काम कर बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट को किया चालू

टीम द्वारा सर्वे किया गया, उसके बाद अहमदाबाद और मुंबई से टेक्नीशियन  बुलवाए गए और 150 से ज्यादा लोगों को दिन- रात काम पर लगाया गया. अब मंगलवार से ऑक्सीजन के करीब 3500 से 4000 सिलेंडर प्रतिदिन मिलना शुरू हो जाएंगे. प्लांट की क्षमता 30 टन ऑक्सीजन तैयार करने की है. प्लांट में 24 घंटे जिला प्रशासन के अफसर तैनात रहेंगे और प्रदेश के 20 जिलों को ऑक्सीजन की सप्लाई की जा सकेगी. उसके अलावा, अन्य राज्यों को भी ऑक्सीजन की पूर्ति की बात कही जा रही है.