सुप्रीम कोर्ट किसान आंदोलन खत्म करने के लिए 12 जनवरी को CJI ने एक कमेटी का गठन की थी.कमेटी में चार लोगो की बनी थी.जिसमें भूपिंदर सिंह मान ने अपना नाम पहले ही वापिस ले लिया था.कमेटी को एक तय समय दिया गया था जिसमें उनको CJI के तरफ से कहा गया था आप सोच विचार कर हमे बताये की बिल में कितनी खूबियां है कितनी खामियां.कमेटी से CJI ने एक रिपोर्ट भी मांगी थी जिसमे उन्हें बताना था की बिल वापिस लेनी चाहिए या नहीं.

तय समय के बाद आज सुप्रीम कोर्ट में इसपे सुनवाई हुई.दलीले दोनों टाफ से दी गयी.किसान ने कमेटी पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा की कमेटी भी सरकार की ही सुनेगी.वो सरकार के प्रभाव में ही फैसला सुनाएगी.इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा की समिति को फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं दिया है, फिर उसके पक्षपाती होने का सवाल कहां से उठता है.

इसके बाद किसान अपने प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली को लेकर भी कोर्ट में पहुंची.उस पर कोर्ट अपनी बात रखते हुए कहा की ये हमारे अधिकार क्षेत्र का काम नहीं है ये फैसला दिल्ली पुलिस करेगी.चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की खंडपीठ ने समिति से जुड़े मामले पर कहा कि पीठ ने समिति में विशेषज्ञों की नियुक्ति की है क्योंकि न्यायाधीश इस मामले के विशेषज्ञ नहीं हैं.

बता दें किसानो के तरफ से प्रशांत भूषण बात रखने पहुँचे थे.उन्होंने ने कहा की किसान कमेटी के सामने न पेश होने का मन बना लिया है.इस पर CJI ने कहा कि अगर आप कमिटी के समक्ष पेश नहीं होना चाहते तो हम आपको बाध्य नहीं करेंगे लेकिन आप कमिटी पर पूर्वाग्रह का आरोप नहीं लगा सकते. चीफ जस्टिस ने कहा, “आप बहुमत की राय के अनुसार लोगों को बदनाम करते हैं. अखबारों में जिस तरह की राय दिखाई दे रही है, उस पर हमें खेद है.”