1. चाइनीज मोबाइल कंपनी वीवो आईपीएल को सालाना 440 करोड़ रुपए देती थी
  2. आधा पैसा 8 फ्रेंचाइजियों में बंटता था, हर फ्रेंचाइजी को 27.5 करोड़ रुपए मिलते थे

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आईपीएल में भी चीन का बायकॉट:वीवो इस साल टाइटल स्पॉन्सर नहीं; बीसीसीआई ने कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया, 2021 से 2023 तक के लिए नई डील हो सकती है
  • चाइनीज मोबाइल कंपनी वीवो आईपीएल को सालाना 440 करोड़ रुपए देती थी
  • आधा पैसा 8 फ्रेंचाइजियों में बंटता था, हर फ्रेंचाइजी को 27.5 करोड़ रुपए मिलते थेचाइनीज मोबाइल कंपनी वीवो इस साल आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सर नहीं होगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने गुरुवार को उसके साथ हुए करार को सस्पेंड कर दिया। बोर्ड ने एक लाइन का बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। इस साल आईपीएल यूएई में 19 सितंबर से 10 नवंबर तक होना है।

वीवो ने 2018 में 2190 करोड़ रुपए में 5 साल के लिए आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप डील हासिल की थी। यह करार 2022 में खत्म होना था। इस डील के तहत वीवो बीसीसीआई को हर साल 440 करोड़ रुपए देता है।

वीवो और बीसीसीआई में नई डील हो सकती है

अब बीसीसीआई इस साल नए टाइटल स्पॉन्सर के लिए टेंडर जारी करेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईपीएल और वीवो के बीच अगले साल 2021 से 2023 तक के लिए नया करार हो सकता है।

डील खत्म होने से फ्रेंचाइजियों को नुकसान होगा
वीवो से आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप डील रद्द होने से फ्रेंचाइजियों को नुकसान होगा, क्योंकि इन्हें स्पॉन्सरशिप डील में से एक हिस्सा मिलता है। वीवो स्पॉन्सरशिप के लिए हर साल बोर्ड 440 करोड़ रुपए देता है। इसमें से आधा पैसा सभी आठों फ्रेंचाइजियों में बराबर बंटता है। हर एक फ्रेंचाइजी को हर साल 27.5 करोड़ रुपए मिलती है।

बोर्ड ऑफिशियल ने बताया कि इतने शॉर्ट नोटिस पर बीसीसीआई के लिए वीवो से एक साल के लिए टाइटल स्पॉन्सरशिप के तौर पर मिलने वाली 440 करोड़ रुपए जुटाना आसान नहीं होगा। ऐसे में बोर्ड और फ्रेंचाइजी को यह नुकसान उठाने के लिए तैयार होना होगा।

बीसीसीआई और वीवो के बीच अगले साल नई डील हो सकती है
अब बीसीसीआई और वीवो नए प्लान पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत चाइनीज मोबाइल कंपनी 2021 में बोर्ड के साथ तीन साल की नई डील कर सकती है। हालांकि, इस मामले पर बोर्ड के एक सीनियर ऑफिशियल की अलग राय है। न्यूज एजेंसी से बात करते हुए इस ऑफिशियल ने कहा कि हम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव की बात कर रहे हैं, आपको लगता है क्या कि नवंबर में जब आईपीएल खत्म होगा और अप्रैल 2021 में नए आईपीएल शुरू होने से पहले क्या चीन विरोधी भावना नहीं होगी? क्या हम इसे लेकर गंभीर हैं?

गवर्निंग काउंसिल ने करार जारी रखने का फैसला किया था

रविवार को हुई आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में वीवो के साथ करार जारी रखने का फैसला किया गया था। इसके अगले दिन सभी फ्रेंचाइजियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें ज्यादातर ने वीवो को बनाए रखने के फैसले पर नाराजगी जताई थी।

आरएसएस समेत कई संगठन ने आईपीएल के बायकॉट की बात कही थी

इसके बाद राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) और उससे जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने भी आईपीएल के बायकॉट की बात कही थी। एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा था, ‘‘जब से गलवान घाटी में हमारे 20 जवान शहीद हुए हैं, तब से देश में चीन और उनकी कंपनियों के खिलाफ विरोध चल रहा है। ऐसे में आईपीएल के ऑर्गनाइजर्स ने चीनी कंपनी को स्पॉन्सर बना दिया। यह दिखाता है कि उनकी भावनाएं सही नहीं हैं। अगर जल्द ही करार को खत्म नहीं किया गया, तो हमारे पास आईपीएल का बायकॉट करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं होगा।’’

भारतीय बाजार में चीनी कंपनियों का दबदबा

पिछले तीन-चार साल में चीनी स्मार्टफोन कंपनियों Xiaomi, Vivo, Oppo, Honor का दबदबा देखा गया है। इन कंपनियों के स्मार्टफोन्स को भारतीय बाजार में यूजर्स काफी पसंद कर रहे हैं। विज्ञापन इंडस्ट्री में भी चाइनीज ब्रैंड ओप्पो, शाओमी और वीवो का दबदबा है। ओप्पो का एडवरटाइजमेंट बजट 700 करोड़ रुपए सालाना है। शाओमी का 200 करोड़ रुपए का बजट है।

पिछले साल वीवो ने आईपीएल के स्पॉन्सर पर 2,190 करोड़ खर्च किए थे। वीवो से बीसीसीआई को करीब 440 करोड़ रुपए का मुनाफा होता है। आईपीएल के एक सीजन में चीन के टीवी ब्रांड का 127 करोड़ का बजट होता है।