कोरोना महामारी के चलते देश की स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है. एक तरफ जहां बेकाबू कोरोना संक्रमण की वजह से रोज नया केस साढ़े तीन लाख के पार जा चुका है तो वहीं मौत का आंकड़ा भी अट्ठाइस सौ के पार पहुंच गया. ऐसे स्थिति में अब कोशिश हो रही है कि जल्द से जल्द देश के लोगों को वैक्सीनेट किया जाए. इस दिशा में केन्द्र सरकार की तरफ से 1 मई से 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन लगाने की इजाजत दी गई है.

साइंटिफिक आधार पर बनी वैक्सीनेशन पॉलिसी

इस बीच, विरोधियों की तरफ से वैक्सीनेशन पॉलिसी की आलोचना पर बीजेपी के सीनियर नेता संबित पात्रा ने सोमवार को जवाब दिया. उन्होंने कहा कि आज जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है. संबित पात्रा ने कहा कि देश की वैक्सीनेशन पॉलिसी किसी एक शख्स ने तय नहीं किया है. यह तीन आधार पर बनाई गई है. पहला यह अच्छे तरह से साइंटिफिक पॉलिसी है, जिसके लिए केन्द्र सरकार ने एक्सपर्ट से सलाह ली है और उसके बाद यह अपनाया गया है.

दुनिया ने किया इस प्रोटोकॉल का पालन

संबित पात्रा ने कहा कि दूसरा यह कि वैक्सीनेशन पॉलिसी डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित गाइडलाइंस के मद्देनजर बनाई गई वैक्सीनेशन पॉलिसी है. और तीसरी यह कि कोविड-19 को लेकर जो विश्व का प्रोटोकॉल है उसके आधार पर सबसे पहले फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 साल से अधिक आयुवर्ग के लोगों को पहले वैक्सीन लगाई गई है. और उसके बाद 45 साल से ऊपर को गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को वैक्सीन दी गई.

वैक्सीनेशन में घुसी राजनीति

बीजेपी प्रवक्ता ने आगे कहा कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि जो 45 साल से ऊपर के थे और गंभीर बीमारी से ग्रसित थे, 90 फीसदी मौत उन्हीं लोगों की देखी गई थी. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया सही चल रही थी. लेकिन उसी दौरान कहीं ना कही राजनीति का प्रवेश हुआ.