उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा है कि कोरोना महामारी के मद्देनजर सीबीएसई की परीक्षा रद्द करने के कारण छात्रों के उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मंजूर की गई योजना उन छात्रों पर भी लागू होगी, जो अंक बढ़ाने के लिए परीक्षा में दोबारा उपस्थित हुए थे, क्योंकि वे भी महामारी के शिकार थे। न्यायालय ने कहा कि नियमित छात्रों की तरह जो लोग सुधार परीक्षा के लिए उपस्थित हुए थे, वे भी मूल्यांकन योजना के अनुसार प्राप्तांक का लाभ उठाने के हकदार होंगे या सीबीएसई द्वारा आयोजित वैकल्पिक परीक्षा के लिए उपस्थित होंगे।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने कहा कि एक छात्र एक वर्ष का बलिदान दिया और साथ ही दो विषयों में अपने अंकों में सुधार किया, जो कि उसने पिछले साल स्कोर किया था। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता कि नियमित छात्रों से उसे अलग कैसे देखा जा सकता है। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी एक छात्र की याचिका पर दिया है जिसने 2019 में 12वीं कक्षा में 95.25 फीसदी अंक प्राप्त किया था। छात्र ने एक साल ड्रॉप करके इस साल एकाउंटेंसी, इंगलिश कोर, इकॉनोमिक्स, और बिजनेस स्ट्डीज में अंक बढ़ोतरी के लिए दोबारा से परीक्षा में शामिल होने का फैसला किया।

याचिका के अनुसार सभी विषयों के परीक्षा नियमित तौर पर हुई, लेकिन कोरोना महामारी के मद्देनजर 24 मार्च को लॉकडाउन के चलते बिजनेस स्ट्डी की परीक्षा रद्द हो गई। याचिकाकर्ता संयम गुप्ता ने न्यायालय में दाखिल याचिका में सुधार परीक्षाओं के लिए उसका परिणाम घोषित करने और बिजनेस स्टडीज के रद्द किए गए पेपर के बारे में उसे नियमित छात्रों के तरह समान व्यवहार करने की मांग की है। याचिका में छात्र ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मंजूर की गई मूल्यांकन योजना का लाभ देने के लिए सीबीएसई को आदेश देने की मांग की है। उच्च न्यायालय ने सीबीएसई को छात्र को सही मार्कशीट जारी करने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने कहा है कि समेकित मार्कशीट को सभी चार विषयों, यानी इंग्लिश कोर, इकोनॉमिक्स, बिजनेस स्टडीज और एकाउन्टेंसी में मिले अंक दर्शाया गया हो। न्यायालय ने 25 जुलाई, 2020 की मूल्यांकन योजना को लागू करने के बाद, एक सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है।