पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मौजूदा हालात में भारत के साथ किसी भी तरह के व्यापार की संभावना से इंकार किया है. वहीं देश में चीनी और कपास की कमी को कहीं से भी पूरा करने की बात कही है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मौजूदा हालात में भारत के साथ किसी भी तरह के व्यापार की संभावना से इनकार किया है. वहीं देश में चीनी और कपास की कमी को कहीं से भी पूरा करने की बात कही है.

कैबिनेट की मीटिंग के बाद लिया फैसला
पीटीआई ने डॉन अखबार के हवाले से खबर दी है कि इमरान खान ने शुक्रवार को कैबिनेट के कुछ सदस्यों के साथ बैठक की. उन्होंने निर्णय किया है मौजूदा हालातों में पाकिस्तान भारत के साथ किसी भी तरह का व्यापार नहीं कर सकता है.

‘कहीं से भी करो चीनी और कपास की व्यवस्था’
डॉन अखबार ने एक सूत्र के हवाले से खबर दी है कि बैठक के बाद पीएम इमरान खान ने वाणिज्य मंत्रालय और उनकी आर्थिक सलाहकार टीम के सदस्यों को चीनी और कपाल की व्यवस्था करने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि जरूरत वाली जिंसों जैसे कि कपास और चीनी इत्यादि के किसी और देश से सस्ते आयात की व्यवस्था की जाए. बता दें कि पाकिस्तान में चीनी अभी 100 रुपये किलो के आस पास बिक रहा है.

भारत से आयात करने से पहले ही कर चुका है इनकार

पाकिस्तान बृहस्पतिवार को भारत से चीनी और कपास के आयात को लेकर पहले ही इनकार कर चुका है. इससे पहले पाकिस्तान की कैबिनेट की इकोनॉमिक कोर्डिनेशन कमेटी ने भारत से चीनी और कपास के आयात की सिफारिश की थी जिस पर अंतिम मुहर कैबिनेट को लगानी थी लेकिन पाकिस्तान के पीएम ने कमेटी की सिफारिश को मंजूर नहीं किया.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी ने भी भारत सरकार के 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के निर्णय को वापस नहीं लेने तक संबंधों के सामान्य होने से इनकार किया था.

बता दें कि पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति है कि पड़ोसी मुल्क के साथ बातचीत और आतंकवाद साथ नहीं चल सकता है. इस वजह से पाकिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध शिथिल बने हुए हैं. पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से आयातित वस्तुओं पर 200 प्रतिशत तक का शुल्क लगा दिया था. जबकि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार संबंध निलंबित हैं.

मई 2020 में कोविड-19 महामारी के देखते हुए पाकिस्तान ने मजबूरीवश भारत से आवश्यक दवाओं के आयात पर लगा बैन वापस ले लिया था.