केनरा बैंक से करीब 198 करोड़ रुपये की कथित जालसाजी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा, उनके पिता रमेश और भाई अजय के खिलाफ फिर केस दर्ज किया है. नए सिरे से केस दर्ज करने के बाद सीबीआई ने आरोपियों के कई ठिकानों की तलाशी ली ।

केनरा बैंक ने आरोप लगाया है कि चंद्रा के पर्सनल और कॉरपोरेट गारंटी के आधार पर कंपनी ने कर्ज हासिल किये, लेकिन बाद में रियल एस्टेट बाजार में मंदी आने वजह से कंपनी ने डिफाल्ट करना शुरू कर दिया।

यूनिटेक के खिलाफ दिल्ली पुलिस, सीबीआई, ईडी सहित कई एजेंसियां जांच कर रही हैं. गौरतलब है कि चंद्रा को 2जी स्पेक्ट्रम मामले में भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया ।

संजय चंद्रा को शुक्रवार को ही मेडिकल ग्राउंड पर दिल्ली हाई कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत के बाद 43 महीनों के बाद तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था. सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक इसके बाद उनके कई परिसरों में सर्च अभियान चलाया गया ।

एफआईआर के मुताबिक केनरा बैंक ने आरोप लगाया है, ‘29,800 मकान खरीदारों से जुटाई गयी करीब 1,4270 करोड़ रुपये की रकम में से करीब 5063.05 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी ने निर्माण कार्यों में नहीं किया. इसी तरह छह वित्तीय संस्थाओं से हासिल करीब 1806 करोड़ रुपये की रकम में से भी 763 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी ने प्रोजेक्ट के लिए नहीं किया.’

ऑडिट से यह भी पता चलता है कि कंपनी ने 2007 से 2010 के बीच टैक्स हैवन कहलाने वाले देश साइप्रस से 1,745 करोड़ रुपये का निवेश किया।

कंपनी को फिलहार सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया है और सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के बहीखाते के फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया था. इस ऑडिट से पता चला कि कंपनी ने फंड का डायवर्जन और उसकी हेराफेरी का काम किया है |