बजट 2021 : जानिए क्या होता है बजट, कब और कैसे हुई थी शुरुवात ?

इन दिनों एक टर्म “बजट” सुर्खियों में है। आगामी 29 जनवरी से संसद के बजट सत्र का आगाज हो जाएगा। बजट सत्र के दौरान ही बजट पेश किया जाएगा । किसी भी देश का विकास किस दिशा में जा रहा है, उसका पता लगाने के लिए बजट बेहद अहम होता है लेकिन बतौर एक आम नागरिक क्या आप जानते हैं कि बजट क्या होता है और यह कैसे बनाया जाता है। आइए जानते हैं
क्यों जरुरी है और इसकी शुरुवात कब हुयी।

जिस तरह से एक घर में खर्चों और कमाई का पूरा हिसाब किताब रखा जाता है. उसी तरह सरकार भी सभी खर्चों और आय का पूरा हिसाब रखती है, जिसे बजट कहा जाता है।

बजट शब्द फ्रेंच भाषा के शब्द Bougett से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है चमड़े का थैला। दरअसल 1773 में तत्कालीन ब्रिटिश वित्त मंत्री ने संसद के सामने वित्तीय प्रस्ताव पेश किया था। वित्तमंत्री अपने वित्तीय प्रस्ताव के दस्तावेजों को चमड़े के थैले में रखकर लाए थे।
तभी से इसे बजट का नाम दे दिया गया था। हमारे संविधान में बजट शब्द का उल्लेख नहीं है लेकिन संविधान के अनुच्छेद 112 में वार्षिक वित्तीय विवरण के नाम से इसकी जानकारी दी गई है।

भारत का पहला बजट साल 1860 में जेम्स विल्सन ने पेश किया था । वहीं आजाद भारत का पहला बजट साल 1947 में आरके सरमुखम शेट्टी ने पेश किया था। नॉर्थ ब्लॉक में बना वित्त मंत्रालय बजट तैयार करता है। जिसे अर्थशास्त्री, वित्त मामलों के जानकार और तमाम दूसरे विशेषज्ञ तैयार करते हैं।

राष्ट्रपति की सहमति से केन्द्रीय वित्त मंत्री लोकसभा में बजट पेश करते हैं। संसद में बजट को धन निधेयक (Money Bill) के रूप में पेश किया जाता है। बजट में हर साल नई योजनाओं की घोषणा की जाती है, साथ ही टैक्स में भी संशोधन किया जाता है। जिसका सीधा असर देश के आम नागरिक पर पड़ता है।

अब जानते है क्यों जरुरी है बजट ? और ये कितने तरह का होता है
किसी भी अर्थव्यवस्था में विकास कार्यों और आधारभूत जरूरतों के लिए धन की जरूरत होती है। इस धन की पूर्ति के लिए ही बजट का निर्माण किया जाता है। अर्थव्यवस्था को सही तरह से चलाने के लिए प्रत्येक मद में निर्धारित बजट का आवंटन किया जाता है। बजट में तय धनराशि से ज्यादा धन खर्च नहीं किया जा सकता। अगर किसी मद में ज्यादा धन की जरूरत पड़ जाती है तो उसके लिए संसद की स्वीकृति आवश्यक होती है।

तकनीकी तौर पर बजट भारत में पांच तरह का होता है. जिसे आम बजट, परफॉर्मेंस बजट, जीरो बेस बजट, आउटकम बजट और जेंडर बजट के तौर पर जाना जाता है।
आम बजट से सरकारी खर्चों पर नियंत्रण और विकास कार्यों को गति देने का काम किया जाता है।
Performance Budget में चालू वित्तीय वर्ष को आधार मानकर अगले वित्तीय वर्ष का बजट तैयार करने को परफॉर्मेंस बजट कहते हैं।

जीरो बेस बजट में नए साल के लिए बिल्कुल नए सिरे से बजट तैयार किया जाता है और उसमें पिछले बजट का कोई जिक्र नहीं होता है. आय कम होने और खर्च अधिक होने की स्थिति में इसे जारी किया जाता है। जिससे खर्चों में कटौती की जा सके इस साल कोरोना को देखते हुए यह बेहद अहम रहेगा।

आउटकम बजट में किसी मंत्रालय या विभाग को आवंटित की गई धनराशि की समीक्षा करने के लिए आउटकम बजट लाया जाता है। विकास योजनाओं के देश, समाज पर असर को जानने के लिए यह बजट बेहद अहम है।

जेंडर बजट की मदद से देश में लिंग के आधार पर योजनाओं का आवंटन किया जाता है। इसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।

भारत में अगस्त-सितंबर से बजट बनना शुरू हो जाता है। इसकी शुरुआत बजट सर्कुलर से होती है, जो वित्त विभाग द्वारा जारी किया जाता है इस सर्कुलर के द्वारा वित्त विभाग सरकार के सभी मंत्रालयों से आय-व्यय का पूरा ब्यौरा मांगता है। मंत्रालयों से मिले ब्यौरे के आधार पर ही सरकार बजट की रूप-रेखा तैयार करती है। वित्त मंत्रालय में हलवा सेरेमनी के साथ बजट की छपाई का काम शुरू हो जाता है।

आम बजट एक वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा होता है । पहले रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश होते थे लेकिन एक अप्रैल 2017 को रेल बजट और आम बजट को एक कर दिया गया। साल 2000 से पहले आम बजट संसद में शाम 5 बजे पेश होता था। दरअसल आजादी से पहले भारत का बजट ब्रिटेन की संसद में दोपहर में पास होता था। जिसके बाद इसे शाम में भारत में पेश किया जाता था।
साल 2000 में इसका समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया गया. यशवंत सिंह ने पहली बार सुबह 11 बजे बजट पेश किया था।