सुभाष चंद्र बोस की आज 125 वी जयंती है.उनके द्वारा कहे कुछ अनमोल शब्द मै आपके सामने रखता हूँ.’ तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा…’.सुभाष चंद्र बोस एक खड़े बोली के नेता थे.और ‘ नेता जी ‘ के के नाम से ही मशहूर थे.आइये जानते है नेता जी सुभाष चंद्र बोस से जुडी कुछ अनकही बात और अनसुलझी किस्से –

1 . नेता जी का जन्म आज की तारीख मतलब 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था.नेता जी एक सुखी और संपन्न परिवार से तालुक रखते थे.सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही मेधावी छात्र रहे है.और अपनी बात रखने में शुरुआत से ही आगे खड़े नज़र आये है.

2 . नेता जी अपनी स्कूली शिक्षा कुट्टक में रहकर रेवेंशॉव कॉलेजिएट में किया था.उसके बाद सुभाष चंद्र बोस उच्य शिक्षा हासिल करने के कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लेते है.उसके बाद वो प्रसाशनिक सेवा की तैयारी के लिए बोस इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय लिए रवाना हो जाते है.

2 . साल 1921 में सुभाष चंद्र बोस अपने प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी छोड़ देश को आज़ाद कराने की लड़ाई में कूद पड़े थे.नेता जी युवावर्ग में काफी प्रचलित नेता बन गए थे उस ज़माने में.नेता जी को गरम दल के नेता लोग कहते है.उसके बाद आजाद हिंद फौज का गठन किया था.

3 . सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी के बिच हमेसा से एक खाई से बनी रही है.महात्मा गाँधी और नेता जी में अंतर् बस इतना था की,एक हिंसा पर भरोसा करने वाले थे तो एक अहिंसा पर.सुभाष चंद्र बोस को ऐसा लगता था मानो बिना अहिंसा किये हम आज़ादी नहीं पा सकते.इसके सीधे उलटे थे महात्मा गाँधी.

4 . महात्मा गाँधी और नेता जी सुभाष चंद्र बोस के विचार अलग थे ,मगर मंज़िल एक थी.देश को आज़ाद करवाना.अंग्रेज़ों के चंगुल से भारत को पुनः सोने की चिड़िया बनाना.एक शब्द में कहे तो मक़सद एक था,मंज़िल एक थी रास्तें अलग – अलग थे.

5 . नेता जी 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में राष्ट्रध्वज फहरा एक विशाल जान आंदोलन का अगवानी करने वाले थे ,लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती है.और उनपर लाठी डंडे भी बरसाती है.उसके बोस को पुलिस जेल भेज देती है.नेता जी बिलकुल जख्मी हालत में होते है फिर भी पुलिस हवालात में बंद रखने से बाज़ नहीं आती.

6 . नेताजी ने आजाद हिंद फौज में भर्ती होने वाले नौजवानों को ‘‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा.” का ओजपूर्ण नारा दिया. सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के कमांडर की हैसियत से भारत की अस्थायी सरकार बनायी, जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी थी.

7. साल 1942 में नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने हिटलर से मुलाकात की थी. लेकिन हिटलर के मन में भारत को आजाद करवाने के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं थी. हिटलर ने सुभाष को सहायता का कोई स्पष्ट वचन नहीं दिया था

8 . इसके बाद आजाद हिंद सरकार की अपनी बैंक थी, जिसका नाम आजाद हिंद बैंक था. आजाद हिंद बैंक की स्थापना साल 1943 में हुई थी, इस बैंक के साथ दस देशों का समर्थन था. आजाद हिंद बैंक ने दस रुपये के सिक्के से लेकर एक लाख रुपये का नोट जारी किया था.

9 . साल 1945 में 18 अगस्त को ताइवान में एक विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत हो गई थी. लेकिन भारत में बहुत बड़ा तबका ये मानता रहा कि सुभाष बोस जीवित बच निकले थे और वहां से रूस चले गए थे.सुभाष चंद्र बोस की मौत आज तक एक रहस्य की तरह ही है.

10 . एक कहानी भारत में प्रचलित है की नेता जी 1980 तक ज़िंदा थे.1980 के दशक के बीच उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में एक गुमनाम साधु के वेश में रह रहे थे. पूर्व पत्रकार अनुज धर की पुस्तक ‘व्हाट हैपेंड टू नेताजी?’ में बोस के जीवन के रहस्य के फैजाबाद पहलू पर गौर करने से पहले उनकी मौत के तीन प्रमुख सिद्धांतों का ब्योरा है