नीतीश सरकार के भवन निर्माण मंत्री डॉ. अशोक चौधरी और सूचना व जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार 2014 में विधान परिषद सदस्य चुने गए थे. नीरज कुमार स्नातक कोटे से सदस्य थे जबकि अशोक चौधरी विधायक कोटे से चुने गए थे. नीरज कुमार एक बार फिर से पटना क्षेत्र से स्नातक सीट से एनडीए प्रत्याशी के तौर चुनावी मैदान में उतरे हैं, जिसका नतीजा 12 नंवबर को आएगा. वहीं, अशोक चौधरी के एमएलसी मनोनीत होने की संभावना थी, जो आचार संहित लागू हो जाने के चलते नहीं हो सकी. यही वजह है कि अब इन दोनों नेताओं का कार्यकाल खत्म हुए 6 महीने पूरे हो गए हैं, जिसके चलते उन्हें कैबिनेट से हटना पड़ा है।

बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण की 78 सीटों पर शनिवार को वोटिंग होगी और नतीजे 10 नवंबर को आएंगे. इस बीच नीतीश सरकार के दो मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो गई है, जिनमें जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी और नीरज कुमार शामिल हैं. ये दोनों मंत्री विधान परिषद सदस्य थे, जिनका कार्यकाल 6 मई को ही पूरा हो गया था. छह महीने गुजर जाने के बाद दोनों नेता किसी भी सदन के सदस्य नहीं चुने जा सके हैं, जिसके चलते अब उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

दरअसल, बिना किसी की सदन के सदस्य रहते हुए मंत्री पद रखने के लिए संविधान की धारा 164 (4) के अनुसार 6 माह में राज्य के किसी सदन विधानसभा या फिर विधान परिषद का सदस्य होना अनिवार्य है. ऐसे में अशोक चौधरी और नीरज कुमार कार्यकाल पूरा होने के बाद छह माह बाद भी किसी सदन के सदस्य चुने नहीं जा सके. बिहार की स्नातक कोटे की सीट पर कोरोना संक्रमण के चलते समय से चुनाव नहीं सके, जिसके चलते नीरज कुमार को कुर्सी छोड़नी।