कोरोना के साथ-साथ भारी बारिश से उपजे बाढ़ के इस विकराल रूप पर बिहार, असम और पश्चिम बंगाल से एक रिपोर्ट .

बिहार: बाढ़ और बढ़ते संक्रमण के बीच लाखों लोग घरों से बाहर रहने को मजबूर

बिहार से बीबीसी के सहयोगी पत्रकार नीरज प्रियदर्शी ने बताया कि कोरोना वायरस ‌संक्रमण के रोज़ाना रिकॉर्ड बढ़ते मामलों के बीच बिहार में बाढ़ ने भी तबाही मचानी शुरू कर दी है.

उत्तर बिहार के कई ज़िलों में भारी बारिश के कारण नदियाँ ख़तरे के निशान को पार कर गई हैं.

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक़, आठ ज़िलों के 150 से अधिक ग्राम पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले तीन लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. 12 हज़ार से अधिक की आबादी अपने घरों से बाहर है. पाँच राहत शिविर चलाये जा रहे हैं.

चिंता इस बात की है कि बाढ़ प्रभावित यह जनसंख्या कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में ‘स्टे होम, स्टे सेफ़’ का पालन कैसे करेगी?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को निर्देश जारी किया कि प्रभावितों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए जागरूकता फ़ैलाई जाये. लेकिन राहत शिविरों में और ऊंचे स्थानों पर रह रहे प्रभावित लोगों के समूह में यह संभव नहीं दिखता जहाँ लोग अपना घर-बार छोड़ कर और जान बचाकर पहुँचे हैं.

जल संसाधन विभाग के सचिव संजीव हंस ने बताया है कि “मौसम विभाग ने बिहार में भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की थी. बागमती और गंडक के कैचमेंट में काफ़ी ज़्यादा बरसात हुई है. हम लोग पिछले कई दिनों से नेपाल के 22 स्टेशनों का विश्लेषण कर रहे हैं जिसमें से 6 स्टेशनों में 100 एमएम से ज़्यादा बारिश हुई है.”

उन्होंने बताया, “गंडक के कैचमेंट में पिछले 12 घंटे में अधिक बारिश हुई है जिसके कारण जलस्तर बढ़ गया है. गंडक का जलस्तर अभी और बढ़ने की आशंका है. इसको लेकर बेतिया, छपरा और वैशाली के डीएम को अलर्ट कर दिया गया है. बगहा टाउन में आबादी को हटाने का काम शुरू किया गया है.”

हंस ने बताया कि ‘गोपालगंज में भी लोगों को ऊंचे क्षेत्रों में जाने को कहा गया है. पिछले 24 घंटे में बागमती के जलस्तर में भी वृद्धि हुई है जिससे लगभग 76 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा है. ये खतरे के निशान से 83 सेंटीमीटर ऊपर है.’

जल संसाधन विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में ढेंग में बागमती नदी के जलस्तर में क़रीब 80 सेंटीमीटर और वृद्धि होने की आशंका है. रुन्नीसैदपुर में इसका अधिक प्रभाव होगा, वहाँ भी जलस्तर में वृद्धि होने की संभावना है.

बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर भी बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है जिससे मुज़फ़्फ़रपुर शहर पर भी बाढ़ का ख़तरा मंडराने लगा है.

कमला बलान नदी के क्षेत्र में भी पिछले 24 घंटे में बारिश हुई है जिसके कारण मधुबनी के जयनगर में लगभग 50 सेंटीमीटर और झंझारपुर रेल पुल के पास 85 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है. राज्य में 20 से 22 जुलाई तक भारी बारिश होने की आशंका है.

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असम: बाढ़ से मरने वालों की संख्या हुई 85, अब तक 70 लाख प्रभावित

गुवाहाटी से बीबीसी के सहयोगी पत्रकार दिलीप कुमार शर्मा ने जानकारी दी है कि असम में आई भीषण बाढ़ के कारण अब तक आधिकारिक रूप से 85 लोगों की मौत हुई है. राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनावाल ने मीडिया से कहा है कि ‘असम में आई बाढ़ से अब तक 70 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं.’

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, असम के कुल 33 में से 24 ज़िले अब भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं.

आपदा विभाग की रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘2,254 गाँव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं और सोमवार रात तक 24 लाख 30 हज़ार 502 लोग प्रभावित हुए हैं. बाढ़ के कारण सबसे ज़्यादा नुक़सान धुबड़ी, ग्वालपाड़ा, बरपेटा, मोरीगांव और धेमाजी ज़िले में हुआ है.’

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प्राधिकरण के स्टेट प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर पकंज चक्रवर्ती ने बताया कि “बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में एनडीआरएफ़, एसडीआरएफ़ तथा स्थानीय प्रशासन के अधिकारी बचाव और राहत के कार्य में लगे हुए हैं. इसके अलावा जिन लोगों के घर पूरी तरह बाढ़ के पानी में हैं उनके लिए अलग-अलग ज़िलों में 468 राहत शिविर खोले गए हैं जिनमें फ़िलहाल 48,107 लोग ठहरे हुए हैं.”

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार इस समय ब्रह्मपुत्र का पानी डिब्रूगढ़, जोरहाट, तेजपुर, ग्वालपाड़ा और धुबड़ी में अपने ख़तरे के निशान से ऊपर बह रहा है. जबकि ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ धनश्री, जिया भराली, कोपीली, बेकी और कुशियारा पूरे उफान पर हैं.

डिब्रूगढ़ ज़िले के रोंगमोला गाँव में रहने वाले 39 साल के श्यामल दास का घर बाढ़ के पानी में डूब जाने से वे कई दिनों तक अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ राहत शिविर थे. इस तबाही के लिए दास अपनी किस्मत को कोसते हुए कहते हैं, “कोरोना वायरस के कारण रोज़गार के रास्ते पहले ही पूरी तरह बंद हो गए थे और अब बाढ़ ने घर-खेत तबाह कर दिये हैं. आगे क्या करेंगे, कुछ सोच ही नहीं पा रहें हैं.”

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Image captionबाढ़ की चपेट में मुख्यमंत्री का गाँव और काजीरंगा नेशनल पार्क

दरअसल श्यामल दास का गाँव इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि यहाँ से महज दो किलोमीटर की दूरी पर राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का पैतृक गाँव है. मुख्यमंत्री के मुलुक गाँव में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है.

बाढ़ से निपट रही राज्य सरकार जहाँ पीड़ितों तक राहत और बचाव कार्य पहुँचाने का दावा कर रही है, वहीं कामरूप ग्रामीण ज़िले के डेब्रीडूवा गाँव के अदालत ख़ान कहते हैं, “पिछले एक महीने से बच्चों के साथ राहत शिविर में हूँ लेकिन सरकारी राहत के नाम पर खाने-पीने के लिए कुछ नहीं मिला है. खेत और घर बाढ़ के पानी में डूबे हुए है और कोविड-19 के कारण कहीं मज़दूरी करने जा नहीं सकते. अगर ऐसे संकट के दौरान सरकार भी मदद नहीं करेगी तो हम भूखे मर जाएंगे.”

वन विभाग के अनुसार, बाढ़ के कारण काजीरंगा नेशनल पार्क में अब तक 113 जानवरों की मौत हुई है. जबकि 140 अन्य जानवरों को राष्ट्रीय उद्यान में बचाया गया है. इस दौरान बाढ़ के कारण 9 गैंडों के मरने की बात भी कही जा रही है.

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पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश के कारण हालत गंभीर

कोलकाता से बीबीसी के सहयोगी पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी ने बताया कि पड़ोसी भूटान में बीते कई दिनों से लगातार होने वाली भारी बारिश ने उत्तरी बंगाल के कई ज़िलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर कर दी है.

भूटान के अलावा इस इलाक़े में भी बीते चार-पाँच दिनों से भारी बारिश हो रही है. इलाक़े की तमाम नदियाँ भूटान की पहाड़ियों से ही निकलती हैं. ऐसे में उद्गम स्थल पर बारिश से हर साल कूचबिहार, अलीपुरदुआर और जलपाईगुड़ी इलाके बाढ़ के पानी में डूब जाते हैं.

इस बाढ़ ने जहाँ इलाक़े के कम से कम आधा दर्जन चाय बागानों को जलमग्न कर दिया है, वहीं इससे भूमिकटाव की समस्या भी गंभीर हो गई है.

मालदा ज़िले में महानंदा नदी के तटबंध में दरार के बाद कई तटवर्ती इलाकों में पानी भर गया है. वहाँ से तीन सौ परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है. फिलहाल तटबंध की मरम्मत का काम चल रहा है. ज़िले के दूसरे इलाके में भी सात सौ परिवारों को राहत शिविरों में रखा गया है. जलपाईगुड़ी और अलीपुरदुआर ज़िलों में भी एक हज़ार से ज़्यादा परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है.

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उत्तर बंगाल के विकास मंत्री रबींद्रनाथ घोष ने कूचबिहार में एक उच्च-स्तरीय बैठक में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की है.

वे बताते हैं, “भूटान और इस इलाके में भारी बारिश की वजह से तमाम नदियों का जलस्तर ख़तरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है. इससे अलीपुरदुआर औऱ जलपाईगुड़ी ज़िले के कई इलाके पानी में डूब गए हैं.”

मंत्री ने बताया कि भूटान में दो दिनों के दौरान लगभग दस इंच बारिश होने की वजह से इलाके की नदियां अचानक उफनने लगी हैं. हाथीनाला नदी में पानी बढ़ जाने की वजह से बिन्नागुड़ी, बानरहाट और इलाके के चायबागानों के अलावा जलदापाड़ा नेशनल पार्क के कई हिस्सों में भी पानी भर गया है.

सिंचाई विभाग ने जलपाईगुड़ी ज़िले के दोमोहनी से लेकर मेखलीगंज तक तमाम तटवर्ती इलाकों में रेड अलर्ट जारी कर दिया है.

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बानरहाट के एक चाय बागान में काम करने वाले जनक मुंडा बताते हैं, “सोमवार सुह अचानक पानी हमारे घरों में घुस गया. हमने अपने परिवार के साथ ऊंची जगह पर शरण ली है. निचले इलाके डूब जाने की वजह से कई परिवार नेशनल हाइवे के किनारे रह रहे हैं. इलाके में तीस्ता नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है और यह नेशल हाइवे 10 के समानांतर बह रही है.”

इंडियान टी एसोसिएशन (आईटीए) की डुआर्स शाखा के सचिव संजय बागची ने बताया, “लॉकडाउन की वजह से चाय बागानों में उत्पादन पहले ही घट कर 40 फ़ीसदी रह गया था. अब बाढ़ की मार से इसमें और गिरावट का अंदेशा है.”

इस बीच, कोलकाता स्थित मौसम विभाग ने अगले कुछ तीन-चार दिनों तक हिमालय की तराई वाले इलाकों में बारी बारिश की चेतावनी दी है. इससे बाढ़ की स्थिति गंभीर होने का अंदेशा है.